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डॉक्टरों की तैयारीः पेट में लगेगा दूसरा दिल, कुत्तों पर सफल हुआ प्रयोग

Sun, 10 Dec 2017 02:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 10 Dec 2017 02:26 PM IST
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Doctors plant second heart in tummy of a dog

चिकित्सा के क्षेत्र में रोज होते नए-नए चमत्कारों के बीच भारतीय चिकित्सक भी एक बड़ा कारनामा करने की तैयारी में हैं। सोचिए, इंसानी शरीर में दो आंखे, दो कान और दो गुर्दों के साथ ही अगर दो दिल भी हों तो कैसा लगेगा, जी हां भारतीय चिकित्सक अब इसी दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। 

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इंसान के प्राकृतिक ढांचे में बदलाव का यह जिम्मा उठाया है चेन्नई के चिकित्सकों ने, ‌जिन्होंने दो कुत्तों के पेट में दूसरा दिल फिट कर यह प्रयोग किया है। अब चिकित्सकों की तैयारी इंसानी शरीर में भी इसी तरह दूसरा दिल फिट करने की है जिसे पेट में लगाकर दिल के मरीजों को नई जिंदगी दी जा सकेगी। 
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार शहर के फ्रंटियर लाईलाइन टीम के सदस्यों ने राज्य के प्रत्यारोपण प्राधिकरण से अनुमति मांगी है ताकि वह मिसफिट हार्ट सर्जरी को से पीड़ित लोगों के दिलों को पिगीबैक ट्रांसप्लांट के जरिए बदल सके। 
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मंगलवार को जब कुछ हृदय प्रत्यारोपण सर्जन्स ने अपने प्रयोग को अन्य हृदय शल्य चिकित्सक और ट्रान्सस्टन अधिकारियों के सामने पेश किया तब उनका कहना था कि अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे और बड़े स्तर पर मानव शरीरों में प्रयोग किया जाएगा। एक सदस्य डॉक्टर पी बालाजी ने बताया कि वह इस संबंध में अनुमति के लिए राज्य सरकार को लिख रहे हैं। 

कोयंबटूर में एक मरीज को लगाया गया था छोटा दिल

Doctors plant second heart in tummy of a dog

फ्रंटियर लाइफलाइन के प्रमुख डा. केएम चेरियन ने बताया कि सर्जंस किसी डॉनर के दिल को छोड़ देते हैं अगर उसकी पंपिंग क्षमता 30 फीसदी से भी कम है, वहीं दूसरी ओर हार्ट फेल के कुछ मरीजों को दूसरा दिल ट्रांसप्लांट नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे मल्टी ऑर्गन फेल होने की आशंका बनी रहती है। 

ऐसे मरीजों को लेफ्ट वेंट्रीकुलर असिस्ट डिवाइस की जरूरत होती है जो एक मैकेनिकल पंप होता है जिसे कमजोर दिलों को पंप करने के लिए छाती में लगाया जाता है, जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपये के करीब पड़ती है।  

डॉक्टर चेरियन ने बताया कि इसकी बजाय अगर हम उस मरीज को एक अतरिक्त दिल प्रदान कर देते हैं तो यह पैसे और रिस्क दोनों की बचत करता है। चिकित्सक इसे बायो लेफ्ट वंट्रीकुलर असिस्ट डिवाइस कहते हैं। 

इस साल के शुरूआत में कोयंबटूर में चिकित्सकों ने हेटरोट्रॉपिक हार्ट ट्रांसप्लांट्स को अंजाम दिया जिसमें उन्होंने एक छोटे दिल को छाती में फिट किया। 

वहीं इससे पूर्व जानवरों पर इसके प्रयोग के दौरान दो कुत्तों के पेट में इसी तरह नया दिल फिट किया गया। इनमें से एक कुत्ते की मौत तो पहले दिन ही हो गई क्योंकि उसे जरूरी खून नहीं मिल सका जबकि दूसरे कुत्ता 48 घंटे तक जीवित रहा, इस दौरान वह घूमा भी और खाना भी खाया।

इस सर्जरी से जुड़ी रहीं डा. मधु शंकर ने बताया कि दोनों जानवरों पर किए गए टेस्ट और स्कैन से पता चला कि दूसरा दिल पर्याप्त तरीके से खून पंप कर रहा था। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दोनों की मांसपेशियां भी काम करने योग्य थीं। 

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