पहल: डॉक्टर अब बनेंगे शोधकर्ता, केंद्र सरकार की बड़ी तैयारी; 6,640 नई फेलोशिप से बदलेगा भारत का हेल्थ रिसर्च
भारत में स्वास्थ्य शोध को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने 6,640 फेलोशिप, ट्रेनिंग और स्टार्टअप रिसर्च ग्रांट की घोषणा की है। नई गाइडलाइन के तहत मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को शुरू से रिसर्च से जोड़ा जाएगा। एमबीबीएस-पीजी छात्रों को फेलोशिप, मानदेय और लैब सुविधा मिलेगी। आइए जानते है कि क्या है इस कदम का लक्ष्य?
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भारत में स्वास्थ्य शोध को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए 6,640 नई फेलोशिप, ट्रेनिंग प्रोग्राम और स्टार्ट अप रिसर्च ग्रांट की घोषणा की है। यह पूरा ब्लूप्रिंट दिसंबर 2025 में जारी संशोधित दिशानिर्देशों में शामिल है जिसके तहत पहली बार मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और राष्ट्रीय संस्थानों को जोड़कर देशभर में रिसर्चर तैयार करने का बड़ा मिशन शुरू किया है।
सरकार का मकसद है कि क्लिनिकल सर्विस देने वाले डॉक्टर अब रिसर्चर और साइंटिस्ट की भूमिका भी निभाएं ताकि भारत अपने स्वास्थ्य समाधान खुद तैयार कर सके। नई दिल्ली स्थित स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की नई गाइडलाइन में एमबीबीएस और पीजी छात्रों पर सबसे बड़ा फोकस है।
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छात्रों को दी जाएगी रिसर्च फेलोशिप
आने वाले दो वर्षों में चार हजार से अधिक एमबीबीएस व बीडीएस छात्रों को रिसर्च फेलोशिप दी जाएगी जिन्हें छह महीने तक किसी मान्यता प्राप्त प्रोजेक्ट पर काम करना होगा और लगभग 60 हजार रुपये तक का मानदेय मिलेगा। मेडिकल शिक्षा में पहली बार रिसर्च को शुरुआती स्तर से अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए सभी मेडिकल कॉलेजों को 25–25 लाख रुपये तक की ग्रांट दी जाएगी ताकि वे रिसर्च लैब, डेटा यूनिट, बॉयोस्टैटिसटिक्स सपोर्ट और एथिक्स कमेटी की संरचना मजबूत कर सकें।
60 फीसदी मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च नहीं
केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि आज देश में हो रहे अधिकांश जैव चिकित्सा अनुसंधान कुछ ही मेडिकल कॉलेजों तक सीमित हैं। 60% मेडिकल कॉलेज नियमित रिसर्च नहीं कर रहे। अधिकांश मेडिकल कॉलेजों में एक बड़ी बाधा स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में पर्याप्त और उचित रूप से प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी है जबकि कोरोना महामारी ने यह बताया कि देश को स्वदेशी रिसर्च क्षमता चाहिए।
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दो साल में तीन हजार डॉक्टर बनेंगे वैज्ञानिक
आईसीएमआर 900 से अधिक जेआरएफ–एसआरएफ फेलोशिप, 800 पीजी थीसिस ग्रांट, 300 से ज्यादा ट्रैवल सपोर्ट और 20 स्टार्ट-अप रिसर्च प्रोजेक्ट को फंड देगा। इससे आने वाले दो वर्षों में करीब तीन हजार युवा डॉक्टर सक्रिय रूप से रिसर्च में शामिल होंगे।
एनआरआई वैज्ञानिकों के लिए 1.2 लाख मासिक वेतन
विदेश में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए भी घर वापसी का बड़ा मौका खोला गया है। एनआरआई वैज्ञानिकों के लिए 1.2 लाख मासिक वेतन, 20 लाख वार्षिक रिसर्च फंड और पांच साल का प्रोजेक्ट तय किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में रिवर्स ब्रेन ड्रेन को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा महिला वैज्ञानिकों की वापसी के लिए आईसीएमआर ने दुनिया का सबसे उदार पैकेज शुरू किया है। इस फेलोशिप के तहत 10 लाख रुपये सालाना रिसर्च ग्रांट दी जाएगी। जिनके पास पीएचडी है उन्हें 65 हजार रुपये प्रति माह के साथ समान ग्रांट उपलब्ध होगी। सरकार का लक्ष्य है कि अनुभवी महिला वैज्ञानिक फिर से प्रयोगशालाओं, मेडिकल कॉलेजों और शोध संस्थानों से जुड़ें।
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