फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Do twins really have a telepathy connection, Scientists revealed the truth News In Hindi

जुड़वां बच्चों का रहस्यमय जुड़ाव: टेलीपैथी कनेक्शन सच या सिर्फ संयोग? वैज्ञानिकों ने बताया क्या है पूरी सच्चाई

Tue, 26 Aug 2025 05:37 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 26 Aug 2025 05:37 AM IST
सार

वे अक्सर एक-दूसरे की अधूरी बात पूरी कर देते हैं, बिना तय किए एक जैसे कपड़े पहनकर सामने आ जाते हैं और कभी-कभी तो दावा करते हैं कि वे एक-दूसरे का दर्द भी महसूस कर लेते हैं। इसी कारण जुड़वां बच्चों के बीच भावनात्मक और मानसिक जुड़ाव को लेकर वर्षों से टेलीपैथी की चर्चा होती रही है। हालांकि इन अनुभवों के कई किस्से हैं। आइए जानते टेलीपैथिक कनेक्शन को लेकर वैज्ञानिकों का क्या कहना है?

विज्ञापन
Do twins really have a telepathy connection, Scientists revealed the truth News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik

विस्तार

वे अक्सर एक-दूसरे की अधूरी बात पूरी कर देते हैं, बिना तय किए एक जैसे कपड़े पहनकर सामने आ जाते हैं और कभी-कभी तो दावा करते हैं कि वे एक-दूसरे का दर्द भी महसूस कर लेते हैं। जुड़वां बच्चों के बीच यह अनोखा रिश्ता हमेशा से जिज्ञासा का विषय रहा है। लेकिन क्या सचमुच जुड़वां बच्चों के बीच कोई अदृश्य टेलीपैथिक कनेक्शन होता है? नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने इस पर रोचक दृष्टिकोण पेश किया है। उनका मानना है कि जुड़वां टेलीपैथी के अभी तक ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट  के अनुसार जुड़वां बच्चों के बारे में कई तरह की कहानियां और मिथक प्रचलित हैं। इनमें सबसे चर्चित है ट्विन टेलीपैथी यानी यह विश्वास कि जुड़वां, खासकर समान डीएनए वाले जुड़वां बिना इंद्रियों का इस्तेमाल किए एक-दूसरे की भावनाएं, विचार या दर्द दूर से महसूस कर सकते हैं। कई किस्सों में इसका जिक्र मिलता है।
विज्ञापन


मामले में क्या कहतीं हैं ट्विन स्टडी सेंटर की निदेशक?
कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फुलर्टन की ट्विन स्टडी सेंटर की निदेशक नैंसी सेगल बताती हैं कि इस तरह के अनुभव इतने गहरे होते हैं कि कभी-कभी जुड़वां बच्चों पर परीक्षा में नकल का आरोप तक लग जाता है, क्योंकि उनके उत्तर लगभग एक जैसे होते हैं। वैज्ञानिक इस अवधारणा को एक्स्ट्रासेंसरी परसेप्शन की श्रेणी में रखते हैं। यानी विचार या भावनाएं बिना प्रत्यक्ष संवेदी संपर्क के संचारित होना। फिलहाल जुड़वां टेलीपैथी का वैज्ञानिक सबूत मौजूद नहीं है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- भारत की समुद्र में बढ़ेगी ताकत: आज नौसेना में शामिल होंगे अत्याधुनिक युद्धपोत उदयगिरि और हिमगिरि, खूबियां
विज्ञापन
विज्ञापन


साझा जीवन, साझा प्रतिक्रियाएं
ऐसे में सवाल उठता है कि जुड़वां बच्चों में यह समान कनेक्शन क्यों दिखता है। विशेषज्ञों कहते हैं, असली वजह साझा जीवन व समान अनुभव हैं। वे एक ही घर-परिवार, एक जैसी दिनचर्या और समान परिवेश में बड़े होते हैं। उनका डीएनए, भावनात्मक पैटर्न और सोचने का ढंग अक्सर बेहद मिलता-जुलता होता है। यही वजह है कि वे एक जैसी परिस्थितियों में लगभग समान प्रतिक्रिया देते हैं। सेगल बताती हैं कि यहां तक कि अलग-अलग पले-बढ़े समान जुड़वां भी कई बार समान पसंद-नापसंद दिखाते हैं। यह आनुवंशिक प्रवृत्तियों का नतीजा हो सकता है।


ऐसे पैदा होते हैं जुड़वां बच्चे
विज्ञान के अनुसार जुड़वां दो प्रमुख प्रकार के होते हैं समान (आईडेंटिकल-  मोनोजायगोटिक) और असमान (फ्रैटरनल- डाइजायगोटिक)। इसके तहत समान जुड़वां यह तब होते हैं जब एक ही अंडाणु और शुक्राणु मिलकर निषेचित होते हैं। निषेचन के बाद भ्रूण  शुरुआती अवस्था में दो भागों में बंट जाता है। दोनों भ्रूणों का डीएनए लगभग एक जैसा होता है, इसलिए उनकी शक्ल-सूरत, खून का ग्रुप और कई आनुवंशिक गुण भी एक जैसे होते हैं।  

ये भी पढ़ें:- चिंताजनक: महिलाओं की सेहत पर दिख रहा कोविड का गहरा असर, रक्त वाहिकाएं समय से पांच साल पहले हो रही कमजोर

असमान जुड़वां बच्चों के बारे में समझिए
इसमें एक ही समय में दो अलग-अलग अंडाणु निकलते हैं और दोनों अलग अलग शुक्राणुओं से निषेचित हो जाते हैं। इस तरह माँ के गर्भाशय में दो भ्रूण विकसित होने लगते हैं। फ्रैटरनल जुड़वां की शक्ल-सूरत और स्वभाव में काफी अंतर हो सकता है। वे एक लड़का-एक लड़की भी हो सकते हैं।

कंजॉइन्ड ट्विन्स: जब भ्रूण विभाजन अधूरा रह जाता है और दोनों शरीर आपस में जुड़े रहते हैं।
मिरर इमेज ट्विन्स: कुछ मामलों में जुड़वां का चेहरा और शारीरिक बनावट ऐसे होती है कि वे एक-दूसरे का आईना-प्रतिबिंब लगते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed