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चिंताजनक: महिलाओं की सेहत पर दिख रहा कोविड का गहरा असर, रक्त वाहिकाएं समय से पांच साल पहले हो रही कमजोर

Tue, 26 Aug 2025 05:13 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 26 Aug 2025 05:13 AM IST
सार

एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में खुलासा हुआ है कि हल्के कोविड संक्रमण से जूझीं महिलाओं की रक्त वाहिकाएं औसतन पांच साल पहले बूढ़ी हो रही हैं। यह असर ‘लॉन्ग कोविड’ से पीड़ित महिलाओं में ज्यादा पाया गया। 16 देशों में हुई इस रिसर्च में पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर कोविड के दीर्घकालिक प्रभाव अधिक गंभीर हैं।

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Covid has a profound effect on women's health, blood vessels are getting weak five years before time
कोविड टेस्ट - फोटो : Freepik.com

विस्तार

कोविड-19 का संक्रमण चाहे हल्का ही क्यों न हो खासकर महिलाओं की रक्त वाहिकाओं को औसतन पांच साल पहले बूढ़ा बना सकता है। यह असर उन महिलाओं में ज्यादा पाया गया है जो ‘लॉन्ग कोविड’ के लक्षणों से जूझ रही हैं। यह चौंकाने वाली जानकारी यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में दी गई है। कोरोना महामारी ने दुनिया को जिस तरह झकझोरा उसके बाद से वैज्ञानिक लगातार इसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
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इसी कड़ी में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने पहली बार यह स्पष्ट किया है कि कोविड-19 संक्रमण के महीनों बाद भी शरीर की प्रमुख रक्त वाहिकाओं में समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत देखे गए हैं। अध्ययन का नेतृत्व इटली की प्रोफेसर रोजा मारिया ब्रूनो ने किया। यह रिसर्च सितंबर 2020 से फरवरी 2022 तक 16 देशों में 2,390 लोगों पर किया गया। शोधकर्ताओं ने पल्स वेव वेलोसिटी (पीडब्ल्यूवी) तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे बिना चीरे धमनी की कठोरता मापी जा सकती है।
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जिन लोगों को कोविड हुआ था, उनमें पीडब्ल्यूवी स्तर उन लोगों से अधिक पाया गया जिन्हें संक्रमण नहीं हुआ।हल्के कोविड से उबर चुकी महिलाओं में रक्त वाहिकाएं औसतन 5 साल ज्यादा बूढ़ी दिखीं। आईसीयू में भर्ती महिलाओं में यह बढ़ोतरी 7-8 साल तक दर्ज की गई। पुरुषों में ऐसा कोई स्पष्ट पैटर्न सामने नहीं आया।


महिलाओं पर क्यों ज्यादा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की इम्यून प्रणाली पुरुषों की तुलना में ज्यादा तेज प्रतिक्रिया देती है। यही कारण है कि जहां यह वायरस से लड़ने में मददगार है, वहीं ज्यादा नुकसान भी कर सकती है। थकान और सांस लेने में कठिनाई वाली लॉन्ग कोविड से जूझ रही महिलाओं में यह समस्या ज्यादा गंभीर थी।रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन लोगों को कोविड का टीका लगा था, उनकी रक्त वाहिकाएं अपेक्षाकृत कम सख्त थीं। यानी टीकाकरण ने आंशिक सुरक्षा प्रदान की।

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आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी प्रतिभागियों की निगरानी
प्रोफेसर ब्रूनो का कहना है कि वाहिकाओं की उम्र को मापा और कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जीवन शैली में सुधार,ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की दवाएं इसमें मददगार साबित हो सकती हैं। उनकी टीम आने वाले वर्षों तक प्रतिभागियों की निगरानी करती रहेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोविड से समय से पहले बूढ़ी हुई रक्त वाहिकाएं भविष्य में दिल और दिमाग से जुड़ी बीमारियों के खतरे को और बढ़ाती हैं या नहीं।
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