फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Distress address rather than national address: Congress slams PM Modi

Politics: राष्ट्र के नाम पीएम के संबोधन पर विपक्ष का पलटवार, कहा- सरकारी मंच का दुरुपयोग, आरोप बेबुनियाद

Sat, 18 Apr 2026 11:08 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Sat, 18 Apr 2026 11:08 PM IST
सार

Reactions on PM's Address to Nation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद कांग्रेस ने उन पर पलटवार किया। विपक्षी पार्टी ने कहा कि एक 'हताश और निराश' प्रधानमंत्री ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद राष्ट्र के संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया। कांग्रेस ने उन्हें चुनौती दी कि वे मौजूदा लोकसभा सत्र के भीतर महिलाओं को आरक्षण लागू करने के लिए संसद में विधेयक लाएं। अपने संबोधन में मोदी ने विपक्षी दलों पर सरकार के संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन न करने का आरोप लगाया था। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

विज्ञापन
Distress address rather than national address: Congress slams PM Modi
मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष - फोटो : एएनआई/अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र संबोधन को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा पीएम का संबोधन तथ्यों से परे है। साथ ही ये आरोप लगाया कि पीएम ने सरकारी मंच का इस्तेमाल राजनीतिक भाषण के लिए किया और विपक्ष पर बेबुनियाद आरोप लगाए।
विज्ञापन


कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं के मुद्दों से ज्यादा पार्टी राजनीति पर ध्यान दिया। पार्टी का दावा है कि महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है और उसने 2010 में राज्यसभा में बिल पास कराया था तथा 2023 के कानून का भी समर्थन किया।
विज्ञापन


विपक्षी पार्टी ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाए। साथ ही परिसीमन और महिला आरक्षण को अलग रखने की बात कही। पार्टी ने सरकार पर महिलाओं के मुद्दों पर विफल रहने और देश को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर पलटवार करते हुए कहा कि एक 'हताश और निराश' प्रधानमंत्री ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद राष्ट्र के संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर कहा, पिछले 12 वर्षों में दिखाने के लिए कुछ खास न होने के कारण प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन को 'कीचड़ उछालने और झूठ से भरा' राजनीतिक भाषण बना दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आचार संहिता पहले से लागू है और प्रधानमंत्री ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर अपने विरोधियों पर हमला किया, जो लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है।

खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस का 59 बार जिक्र किया, जबकि महिलाओं का नाम बहुत कम बार लिया, जिससे उनकी प्राथमिकताएं साफ हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दे भाजपा की प्राथमिकता नहीं हैं।

उन्होंने यह भी कहा, कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। 2010 में कांग्रेस ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया था। उन्होंने कहा कि 2023 में भाजपा की ओर से लाए गए विधेयक का भी कांग्रेस ने समर्थन किया था और वह विधेयक अभी भी लंबित है। खरगे ने कहा, 16 अप्रैल को जब लोकसभा में परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों पर चर्चा हो रही थी, उसी दौरान इस विधेयक को अधिसूचित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने ही विधेयक को लागू करने में भाजपा को तीन साल लग गए, जो महिलाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ये भी पढ़ें: 'बस वक्त का इंतजार': महिला आरक्षण पर पीएम मोदी ने आगे की रणनीति पर कर दिया इशारा, कहाम- कल संख्याबल नहीं था

उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वह देश को गुमराह करना बंद करें और 2023 के कानून के तहत मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तुरंत लागू करें। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण विधेयक को मिलाकर पेश करना गलत है। खरगे ने आरोप लगाया कि यह केवल परिसीमन का विधेयक था, जिसका मकसद चुनावी माहौल को इस तरह बदलना है, जिससे भाजपा को फायदा हो सके। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री को 140 करोड़ भारतीयों से माफी मांगनी चाहिए। 

उन्होंने कहा, कांग्रेस हमेशा सुधारों के पक्ष में रही है और हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, अंतरिक्ष क्षेत्र, परमाणु शक्ति, 1991 के आर्थिक सुधार, आधार, आरटीआई, आरटीई, खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा जैसे बड़े कदम कांग्रेस सरकारों ने उठाए। कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी ने महिलाओं के लिए कई अहम कानून बनाए। इनमें हिंदू कोड बिल, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून, घरेलू हिंसा कानून और न्यायमूर्ति वर्मा समिति की सिफारिशों के बाद आपराधिक कानून में सुधार शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का रवैया महिलाओं के खिलाफ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास हाथर, उन्नाव, हरियाणा की महिला पहलवानों और बिलकिस बानो जैसे मामलों पर कोई जवाब नहीं है। 

महिला विरोधी नहीं...मनमाना परिसीमन अस्वीकार्य : खरगे
राज्यसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को साफ किया कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के सांसद महिला विरोधी नहीं हैं। लेकिन मनमाने तरीके से परिसीमन का समर्थन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ राजग सरकार इसका अधिकार हासिल करना चाहती है, जिससे सदन में साधारण बहुमत से किसी भी परिसीमन कानून को पारित या संशोधित किया जा सके।

खरगे ने कहा कि कांग्रेस सांसद लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक का विरोध इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इसमें परिसीमन का प्रावधान है। उन्होंने कहा, हम महिला विरोधी नहीं हैं और लंबे समय से एक तिहाई महिला आरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। हमने 2023 के संशोधन का सर्वसम्मति से समर्थन किया और उसे पारित किया। इसकी आड़ में उन्होंने एक और संशोधन पेश किया, जिसमें परिसीमन का प्रावधान जोड़कर महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को समेकित कर दिया गया।

खरगे ने आगे कहा कि भाजपा संविधान की संरचना को बदलना चाहती है और कार्यपालिका शक्ति को अपने हाथों में लेना चाहती है। इन तीनों विधेयकों को एक साथ लाकर वो इसका अधिकार हासिल करना चाहते हैं कि सदन में साधारण बहुमत से कोई भी परिसीमन कानून पारित और संशोधित किया जा सके...आपको महिला आरक्षण 543 सदस्यों के भीतर करना चाहिए। अगली जनगणना या जाति जनगणना पूरी होने के बाद, आप इसे अगले चुनाव में पूरा कर सकते हैं...आपका इरादा संविधान की संरचना को बदलना और कार्यपालिका शक्ति को अपने हाथों में लेना है।

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा, विधेयक के खारिज होने से पहले ही तख्तियां तैयार थीं, तो इससे यह साफ हो गया कि सरकार इसके लिए मानसिक रूप से तैयार थी।

भाजपा ने समाज में फूट, अविश्वास और डर पैदा किया: डिंपल यादव
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि भाजपा के लोग समाज को बांटने वाले हैं। इन्होंने हमेशा समाज में फूट, अविश्वास और डर पैदा किया है और इसी हथियार के दम पर ये सत्ता में बने रहे हैं। अब लोग इनकी इस चाल को समझ चुके हैं। 

जयराम रमेश ने क्या कहा?
वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन निष्पक्ष होना चाहिए, जिसका उद्देश्य देश में भरोसा और एकता बढ़ाना होता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन को 'कांग्रेस पर हमला करने वाला भाषण' बताया और कहा कि यह एक 'राष्ट्र के नाम संबोधन' की बजाय 'दुःख भरा संबोधन' था, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया जाता, तो ज्यादा उचित होता। रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री को अपने संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित न करा पाने के लिए माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, अब कल पीडीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसमें महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन विधेयक की भाजपाई साजिश का खुलासा होगा।

हमने परिसीमन के बहाने देश नक्शा बदलने की कोशिश को नाकाम किया: प्रमोद तिवारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के नाम संबोधन पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, अगर भाजपा की नीयत साफ होती तो 2023 में पारित हुआ महिला आरक्षण विधेयक को आज से ही लागू कर देती। हमने देश के संविधान की रक्षा की है। हमने परिसीमन के बहाने देश का नक्शा बदलने की कोशिश को नाकाम किया है। अगर आप इतने ही महिलाओं के प्रति दुखी हैं तो प्रधानमंत्री पद किसी महिला को दे दीजिए। पार्टी अध्यक्ष किसी महिला को बना दीजिए। स्पीकर किसी महिला को बना दीजिए। आप ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि आपने तमिलनाडु और बंगाल चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के लिए ये विशेष सत्र बुलाया था। 

अशोक गहलोत ने पूछा सवाल
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा,मैंने प्रधानमंत्री का संबोधन सुना है। उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन किया है। चुनाव चल रहे हैं। जिस प्रकार कांग्रेस, द्रमुक, टीएमसी का नाम लेकर महिला मतदाताओं को भड़का रहे हैं। अगर प्रधानमंत्री स्वयं आचार संहिता का उल्लंघन करेंगे तो लोकतंत्र का क्या होगा?

संघीय ढांचा बदलने की साजिश था संशोधन विधेयक : प्रियंका
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने संविधान संशोधन विधेयक को देश के संघीय ढांचे को बदलने की साजिश करार दिया। कहा, लोकसभा में इसका गिरना लोकतंत्र, संविधान एवं विपक्षी एकजुटता की जीत है। यह आरोप भी लगाया कि सरकार सत्ता के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करना चाहती थी।


प्रियंका ने कहा, सरकार हमें विरोधी बताकर खुद मसीहा नहीं बन सकती। सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीट के आधार पर तत्काल लागू कर सकती है। विपक्ष समर्थन करेगा। प्रियंका ने कहा, कल लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत हुई है। मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश की थी, जिसे हमने हरा दिया। ये संविधान की जीत है, देश की जीत है, विपक्षी एकता की जीत है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन ने क्या कहा?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को कहा कि परिसीमन विधेयक को रोकने में जीत विपक्षी इंडिया गठबंधन समेत सभी विपक्षी दलों के सांसदों के प्रयासों के कारण ही मिल पाई है। हमने जो हासिल किया है वह केवल आधी जीत है। जैसा 2001 में किया गया था, सीटों की संख्या का परिसीमन सांविधानिक रूप से अगले 25 वर्षों के लिए, यानी 2051 तक निलंबित किया जाना चाहिए। स्टालिन ने वीडियो जारी कर कहा, परिसीमन की आड़ में भाजपा को पूर्णतया लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया विधेयक संसद में पराजित हो गया। भाजपा ने महिला आरक्षण की आड़ में इस कानून को लाने की कोशिश की, लेकिन खुद महिलाओं ने ही इसका विरोध किया और उन्हें करारी हार मिली। विधेयक ने न केवल दोस्तों का खुलासा किया है, बल्कि तमिलनाडु के गद्दारों को भी बेनकाब कर दिया है।



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed