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आंध्र प्रदेश में कर्ज आंकड़ों पर विवाद: विपक्ष ने सरकार को घेरा, राज्यपाल को लिखा पत्र; दखल की मांग की
Wed, 08 Apr 2026 03:25 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Wed, 08 Apr 2026 03:25 PM IST
सार
आंध्र प्रदेश में कर्ज के आंकड़ों को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष के नेता बोत्चा सत्यनारायण ने सरकार पर गलत आंकड़े पेश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप और सही जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
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बोत्चा सत्यनारायण
- फोटो : ANI
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विस्तार
आंध्र प्रदेश विधान परिषद में विपक्ष के नेता बोत्चा सत्यनारायण ने राज्यपाल एस अब्दुल नजीर को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने राज्य सरकार पर साल 2024-25 और 2025-26 के कर्ज से जुड़ी जानकारी छिपाने और गलत आंकड़े पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है।
वाईएसआरसीपी (YSRCP) नेता ने कहा कि फरवरी 2026 के सत्र के दौरान वित्त सचिव ने जो जवाब दिया था, उसमें कई जरूरी जानकारियां छोड़ दी गईं। सरकार ने साल 2024-25 के लिए कुल कर्ज 60,485 करोड़ रुपये बताया है। इसके उलट, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के ऑडिट किए गए आंकड़ों के अनुसार यह कर्ज लगभग 81,082 करोड़ रुपये है। इस तरह सरकारी आंकड़ों और कैग की रिपोर्ट में 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का अंतर है।
सत्यनारायण ने इस अंतर की वजह भी समझाई। उन्होंने कहा कि आरबीआई से लिए गए वेज एंड मीन्स एडवांस, पब्लिक अकाउंट की देनदारियां और जीएसटी मुआवजे से जुड़े कर्ज के तालमेल को सही तरीके से नहीं दिखाया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जब राजकोषीय घाटा ही 81,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, तो कर्ज के कम आंकड़े दिखाना राज्य की आर्थिक स्थिति के बारे में गलत तस्वीर पेश करता है। इससे जनता का भरोसा टूटता है।
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ये भी पढ़ें: खरगे ने खेद जताया: 'गुजरात के अपमान' पर सियासी रार! कांग्रेस अध्यक्ष बोले- मेरी बातों का गलत मतलब निकाला गया
विपक्षी नेता ने सरकार के उस दावे को भी गलत बताया जिसमें कहा गया था कि 2025-26 में बजट के बाहर से कोई कर्ज नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकारी गारंटी पर कई निगमों ने कर्ज लिया है, जिसे सरकार ने आंकड़ों में शामिल नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि 2014 से 2024 तक के आंकड़ों में तो पब्लिक डेट को शामिल किया गया, लेकिन 2024-25 और 2025-26 के लिए इसे हटा दिया गया, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सरकार अपना पुराना जवाब वापस ले और कैग के आंकड़ों के हिसाब से सही जानकारी सदन में रखे। साथ ही उन्होंने इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
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वाईएसआरसीपी (YSRCP) नेता ने कहा कि फरवरी 2026 के सत्र के दौरान वित्त सचिव ने जो जवाब दिया था, उसमें कई जरूरी जानकारियां छोड़ दी गईं। सरकार ने साल 2024-25 के लिए कुल कर्ज 60,485 करोड़ रुपये बताया है। इसके उलट, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के ऑडिट किए गए आंकड़ों के अनुसार यह कर्ज लगभग 81,082 करोड़ रुपये है। इस तरह सरकारी आंकड़ों और कैग की रिपोर्ट में 20,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का अंतर है।
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सत्यनारायण ने इस अंतर की वजह भी समझाई। उन्होंने कहा कि आरबीआई से लिए गए वेज एंड मीन्स एडवांस, पब्लिक अकाउंट की देनदारियां और जीएसटी मुआवजे से जुड़े कर्ज के तालमेल को सही तरीके से नहीं दिखाया गया। उन्होंने तर्क दिया कि जब राजकोषीय घाटा ही 81,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है, तो कर्ज के कम आंकड़े दिखाना राज्य की आर्थिक स्थिति के बारे में गलत तस्वीर पेश करता है। इससे जनता का भरोसा टूटता है।
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विपक्षी नेता ने सरकार के उस दावे को भी गलत बताया जिसमें कहा गया था कि 2025-26 में बजट के बाहर से कोई कर्ज नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि सरकारी गारंटी पर कई निगमों ने कर्ज लिया है, जिसे सरकार ने आंकड़ों में शामिल नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि 2014 से 2024 तक के आंकड़ों में तो पब्लिक डेट को शामिल किया गया, लेकिन 2024-25 और 2025-26 के लिए इसे हटा दिया गया, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि सरकार अपना पुराना जवाब वापस ले और कैग के आंकड़ों के हिसाब से सही जानकारी सदन में रखे। साथ ही उन्होंने इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।
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