{"_id":"587118274f1c1b076515a9a2","slug":"dispute-in-congress-over-prashant-kishor","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांग्रेस में रार, पीके रणनीतिकार या सलाहकार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कांग्रेस में रार, पीके रणनीतिकार या सलाहकार
अनूप वाजपेयी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 08 Jan 2017 05:14 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस में अब पीके यानि प्रशांत किशोर को लेकर रार बढ़ रही है। पार्टी में प्रशांत की भूमिका रणनीतिकार की है या सलाहकार की ये सवाल उठने लगे हैं। दरअसल पीके के इवेंट और अन्य गतिविधियों से जुड़ी खबरें मीडिया में आ जाती हैं। जबकि राज्यों के जिम्मेदार प्रमुख पदाधिकारियों को इसकी कोई अधिकारिक जानकारी नहीं होती है। दरअसल पीके पार्टी के लिए जो कुछ कर रहे हैं उसकी जवाबदेही सीधे तौर पर पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को है।
विज्ञापन
हाल में पीके को उत्तराखंड की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अखबारों में आईं खबरों से ही उत्तराखंड के नेताओं को जानकारी मिली। इसकी अधिकारिक जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को भी नहीं है। पूछने पर उन्होंने कहा हां कुछ सुना तो है। किशोर कहते हैं कांग्रेस के पास वरिष्ठ नेताओं और रणनीतिकारों की कमी नहीं है।
विज्ञापन
यूपी में पीके को खुद को समेटने का एक कारण वहां पार्टी की ओर से चुनाव के लिए बनाई गई टीम के सदस्यों प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित, संजय सिंह और प्रमोद तिवारी का पीके के साथ तालमेल न बैठना भी है। यूपी से संबंधित सचिवों ने सार्वजनिक तौर पर पीके को कार्यकर्ता सम्मेलन में मोबाइल नंबर बांटने पर आपत्ति जताई थी। पीके ने यूपी में यात्राओं के दौरान जो कार्यक्रम तैयार किया था उसे लेकर भी पार्टी के नेताओं ने अपने हिसाब से संशोधन कराया था। समाजवादी पार्टी से हो रही बातचीत को लेकर भी पीके पार्टी नेताओं के निशाने पर रहे हैं। यूपी के सभी नेता लगातार यही कहते आ रहे हैं कि अधिकारिक तौर पर कोई बात नहीं हो रही है। गठबंधन की बात कौन किसने कर रहा है इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं है। जबकि प्रशांत किशोर के मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने और गठबंधन को लेकर हुई बातचीत की खबरें मीडिया में आती रहीं।
विज्ञापन
पंजाब में भी पीके को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ बेहतर तालमेल न बैठने की खबरें आती रही हैं। राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद वहां उनकी भूमिका सीमित की गई और उन्हें जनसभा, रैली और सम्मेलनों आदि इवेंट की तैयारियों तक सीमित किया गया है। जबकि पहले उम्मीदवारों को लेकर सर्वे आदि में भी उनकी भूमिका बताई जा रही थी।