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राज्यसभा में ईवीएम पर हुई चर्चा का रविशंकर प्रसाद आज देंगे जवाब
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Thu, 23 Mar 2017 07:58 AM IST
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- फोटो : pti
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चुनाव सुधार और ईवीएम की विश्वसनीयता पर बुधवार को राज्यसभा में चर्चा हुई। विपक्षी सदस्यों ने चुनाव में बढ़े अंधाधुंध खर्च, चुनाव आयोग की पर्याप्त फंडिंग, कॉरपोरेट फंडिंग पर पाबंदी, ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल की अनिवार्यता, मीडिया की भूमिका तय करने आदि विषयों पर अपनी बात रखी। उपसभापति पीजे कुरियन ने इसे अल्पकालिक चर्चा के लिए रखा था लेकिन विपक्षी सदस्यों की मांग पर चर्चा लंबी खिंच गई। लिहाजा केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद इस संबंध में बृहस्पतिवार को अपना जवाब सदन में रखेंगे।
विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पारदर्शी चुनाव कराने के लिए मसल पॉवर से निपटने के लिए ईवीएम शुरू हुई लेकिन मनी पॉवर से निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यूपी में एक पार्टी ने जमकर हेलीकॉप्टर और छोटे जहाज का इस्तेमाल किया। पार्टियां की खर्च सीमा तय हो और चुनाव खर्च संसद के पटल पर रखा जाए। पहले बीएमसी चुनाव में भी गड़गड़ी की बात सामने आई है।
इसी बीच सत्ता पक्ष ने पंजाब में कांग्रेस की जीत की बात उठाई। आजाद ने कहा, हम चुनौती देते हैं कि यूपी के साथ पंजाब में भी बैलट पेपर से चुनाव करा लें। उन्होंने कहा कि आयोग ने तीन साल में सरकार को 12 पत्र लिखकर फंड मांगा है। ताकि ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल लगाया जा सके। प्रधानमंत्री को भी इस संबंध में लिखा गया लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही आयोग को फंड मिला। उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत गुजरात और हिमाचल के चुनाव से होनी चाहिए नहीं तो बैलेट पेपर से चुनाव हो।
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भाजपा के भूपेंद्र यादव ने कहा कि अभी कांग्रेस का दर्द बचा हुआ है। हमारे देश में लगातार कोई ने कोई चुनाव होते रहते हैं इसलिए हमें एक साथ चुनाव के संबंध में सोचना चाहिए। इससे चुनावी खर्च में कमी आएगी। उन्होंने लोकसभा ओर विधानसभा चुनाव में अलग-अलग वोटर लिस्ट की जगह एक लिस्ट की बात कही। साथ ही मतदाता को एक नंबर आवंटित करने की बात कही ताकि तबादला होने पर उसे परेशानी न हो। इस पर विपक्षी सदस्यों ने भी हामी भरी। उन्होंने चुनाव को भारतीय संस्कृति और उत्सव की तरह मनाने के साथ ई-बैलेट की ओर से बढ़ने की सलाह दी।
सपा के प्रो. रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि यूपी चुनाव में उम्मीदवारों को पैसे से खरीद लिया गया। नहीं तो सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी न हारती। उन्होंने कहा कि मनी पॉवर पर अंकुश लगना चाहिए ताकि गरीब भी लड़ सकें। पार्टी के नाम जनसभा का खर्च उम्मीदवारों के खाते में जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया पर भी पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा केंद्र सरकार एक साथ चुनाव कराने की बात कहती है, जो एक साथ संभव नहीं है। 2019 में करा सकते हैं योगी दौड़ा लेंगे। उन्होंने कहा कि ईवीएम का दुरुपयोग हो सकता है। हमें आयोग की निष्पक्षता पर संदेह नहीं है लेकिन जहां मशीन बन रही है चिप लगाई जा रही है ऐसे में हाथी पर बटन दबाने पर कमल पर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि मेरठ में 20 जगह मशीन के साथ पेपर ट्रेल लगाए गए थे जिसमें 16 जगह सपा आगे रही। दो जगह भाजपा और दो जगह बसपा है। पोस्टर बैलेट की गिनती में भी सपा को अधिक वोट मिले हैं। उन्होंने सत्तापक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे में आप पर संदेह है।
जदयू नेता शरद यादव ने कहा कि चार बार की सीएम रही मायावती जी के मन में है मशीन ने उन्हें हरा दिया है। शंका है एडवांस तकनीक है एक जांच कमीशन बन जाए या हाउस कमेटी बन जाए जो जांच कर लें। उन्होंने कहा कि चुनाव में इस कदर पैसा खर्च हो रहा है जो लोकतंत्र के लिए घातक है। ऐसे में मधुलिमेय, डा. लोहिया, अटल और आडवाणी जैसे नेता चुनाव जीतकर नहीं आ पाएंगे। लोगों का विश्वास उठेगा और बगावत होगी। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए।
सीताराम येचुरी ने कारपोरेट फंडिंग बंद करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि फंड के लिए दो हजार रुपये की सीमा तय करना आंखों में धूल झोंकने जैसा है। बसपा सांसद सतीश मिश्र भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हाराव की पुस्तक डेमोक्रेसी ऐट रिस्क लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि ईवीएम की खामियों को दर्शाती इस पुस्तक की भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी है। किताब में भाजपा नेताओं ने खुद लिखा है कि ईवीएम पर विश्वास नहीं है।
वहीं भाजपा नेता सुब्रह्मणयम स्वामी ने तो सुप्रीम कोर्ट को तथ्यों के आधार पर आश्वस्त कराया है कि ईवीएम में गड़बड़ी हो सकती है। जिस जापान में ईवीएम की चिप बनती है वहां भी ईवीएम से चुनाव नहीं होते हैं। अगर एक प्रतिशत भी छेड़छाड़ की संभावना है तो यूपी के चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव नहीं कहे जा सकते हैं। उन्होंने कहा भाजपा को किसी मठ में जाने की जरूरत नहीं उसे तो मशीनों की पूजा करनी चाहिए जिसने जिताया है। उन्होंने चुनाव बैलेट पेपर से होने की बात कही।
एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि वर्तमान में 55 हजार मशीनों के लिए पेपर ट्रेल उपलब्ध है ऐसे में तय होना चाहिए कि गुजरात चुनाव में ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल जरूर हो। सांसद मुकुल राय ने कहा कि चुनाव फंडिंग में दानदाता का पता चलना चाहिए। चुनाव का खर्च स्टेट फंडिंग से हो ताकि गरीब भी चुनाव लड़ सके। मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने यूपी,पंजाब, गोवा में दलगत मिले मत प्रतिशत पेश किए और जनादेश के अपमान को लोकतंत्र का अपमान बताया।
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विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पारदर्शी चुनाव कराने के लिए मसल पॉवर से निपटने के लिए ईवीएम शुरू हुई लेकिन मनी पॉवर से निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यूपी में एक पार्टी ने जमकर हेलीकॉप्टर और छोटे जहाज का इस्तेमाल किया। पार्टियां की खर्च सीमा तय हो और चुनाव खर्च संसद के पटल पर रखा जाए। पहले बीएमसी चुनाव में भी गड़गड़ी की बात सामने आई है।
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इसी बीच सत्ता पक्ष ने पंजाब में कांग्रेस की जीत की बात उठाई। आजाद ने कहा, हम चुनौती देते हैं कि यूपी के साथ पंजाब में भी बैलट पेपर से चुनाव करा लें। उन्होंने कहा कि आयोग ने तीन साल में सरकार को 12 पत्र लिखकर फंड मांगा है। ताकि ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल लगाया जा सके। प्रधानमंत्री को भी इस संबंध में लिखा गया लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही आयोग को फंड मिला। उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत गुजरात और हिमाचल के चुनाव से होनी चाहिए नहीं तो बैलेट पेपर से चुनाव हो।
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भाजपा के भूपेंद्र यादव ने कहा कि अभी कांग्रेस का दर्द बचा हुआ है। हमारे देश में लगातार कोई ने कोई चुनाव होते रहते हैं इसलिए हमें एक साथ चुनाव के संबंध में सोचना चाहिए। इससे चुनावी खर्च में कमी आएगी। उन्होंने लोकसभा ओर विधानसभा चुनाव में अलग-अलग वोटर लिस्ट की जगह एक लिस्ट की बात कही। साथ ही मतदाता को एक नंबर आवंटित करने की बात कही ताकि तबादला होने पर उसे परेशानी न हो। इस पर विपक्षी सदस्यों ने भी हामी भरी। उन्होंने चुनाव को भारतीय संस्कृति और उत्सव की तरह मनाने के साथ ई-बैलेट की ओर से बढ़ने की सलाह दी।
सपा के प्रो. रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि यूपी चुनाव में उम्मीदवारों को पैसे से खरीद लिया गया। नहीं तो सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी न हारती। उन्होंने कहा कि मनी पॉवर पर अंकुश लगना चाहिए ताकि गरीब भी लड़ सकें। पार्टी के नाम जनसभा का खर्च उम्मीदवारों के खाते में जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया पर भी पक्षपात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा केंद्र सरकार एक साथ चुनाव कराने की बात कहती है, जो एक साथ संभव नहीं है। 2019 में करा सकते हैं योगी दौड़ा लेंगे। उन्होंने कहा कि ईवीएम का दुरुपयोग हो सकता है। हमें आयोग की निष्पक्षता पर संदेह नहीं है लेकिन जहां मशीन बन रही है चिप लगाई जा रही है ऐसे में हाथी पर बटन दबाने पर कमल पर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि मेरठ में 20 जगह मशीन के साथ पेपर ट्रेल लगाए गए थे जिसमें 16 जगह सपा आगे रही। दो जगह भाजपा और दो जगह बसपा है। पोस्टर बैलेट की गिनती में भी सपा को अधिक वोट मिले हैं। उन्होंने सत्तापक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे में आप पर संदेह है।
जदयू नेता शरद यादव ने कहा कि चार बार की सीएम रही मायावती जी के मन में है मशीन ने उन्हें हरा दिया है। शंका है एडवांस तकनीक है एक जांच कमीशन बन जाए या हाउस कमेटी बन जाए जो जांच कर लें। उन्होंने कहा कि चुनाव में इस कदर पैसा खर्च हो रहा है जो लोकतंत्र के लिए घातक है। ऐसे में मधुलिमेय, डा. लोहिया, अटल और आडवाणी जैसे नेता चुनाव जीतकर नहीं आ पाएंगे। लोगों का विश्वास उठेगा और बगावत होगी। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए।
सीताराम येचुरी ने कारपोरेट फंडिंग बंद करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि फंड के लिए दो हजार रुपये की सीमा तय करना आंखों में धूल झोंकने जैसा है। बसपा सांसद सतीश मिश्र भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हाराव की पुस्तक डेमोक्रेसी ऐट रिस्क लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि ईवीएम की खामियों को दर्शाती इस पुस्तक की भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी है। किताब में भाजपा नेताओं ने खुद लिखा है कि ईवीएम पर विश्वास नहीं है।
वहीं भाजपा नेता सुब्रह्मणयम स्वामी ने तो सुप्रीम कोर्ट को तथ्यों के आधार पर आश्वस्त कराया है कि ईवीएम में गड़बड़ी हो सकती है। जिस जापान में ईवीएम की चिप बनती है वहां भी ईवीएम से चुनाव नहीं होते हैं। अगर एक प्रतिशत भी छेड़छाड़ की संभावना है तो यूपी के चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव नहीं कहे जा सकते हैं। उन्होंने कहा भाजपा को किसी मठ में जाने की जरूरत नहीं उसे तो मशीनों की पूजा करनी चाहिए जिसने जिताया है। उन्होंने चुनाव बैलेट पेपर से होने की बात कही।
एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि वर्तमान में 55 हजार मशीनों के लिए पेपर ट्रेल उपलब्ध है ऐसे में तय होना चाहिए कि गुजरात चुनाव में ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल जरूर हो। सांसद मुकुल राय ने कहा कि चुनाव फंडिंग में दानदाता का पता चलना चाहिए। चुनाव का खर्च स्टेट फंडिंग से हो ताकि गरीब भी चुनाव लड़ सके। मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने यूपी,पंजाब, गोवा में दलगत मिले मत प्रतिशत पेश किए और जनादेश के अपमान को लोकतंत्र का अपमान बताया।