महाराष्ट्र में नए कृषि कानून पर महाविकास आघाडी सरकार में मतभेद!
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कांग्रेस नेताओं ने धमकी दी कि अगर नए कृषि कानून पर रोक नहीं लगाई गई तो कांग्रेस के मंत्री मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा नहीं लेगे...
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देश में नए कृषि कानून को लेकर महाराष्ट्र के तीन दलों (शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी) की महाविकास आघाड़ी सरकार में मतभेद बढ़ गए हैं। कांग्रेस और एनसीपी इसके विरोध में है जबकि शिवसेना नए कृषि कानून के समर्थन में है। सहयोगी दलों के विरोध के कारण राज्य में ऩए कृषि कानून पर रोक लगा दी गई है। वहीं, इस पर पुनः अमल के लिए एक उपसमिति भी गठित कर दी गई है।
संसद में कृषि सुधार विधेयकों के पारित होने से पहले ही महाराष्ट्र में नया कृषि कानून लागू कर दिया गया था। इससे सहयोगी दल कांग्रेस की स्थिति हास्यास्पद हो गई थी। इसलिए राज्यमंत्रिमंडल की बैठक से पहले कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाया। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को कांग्रेस नेताओं ने धमकी दी कि अगर नए कृषि कानून पर रोक नहीं लगाई गई तो कांग्रेस के मंत्री मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा नहीं लेगे।
यह भी चेतावनी दी गई कि एनडीए की तर्ज पर कुछ मंत्री इस्तीफा भी दे सकते हैं। सहयोगी दलों के दबाव में उद्धव ठाकरे को झुकना पड़ा और राज्य में नए कृषि कानून पर रोक लगा दी गई। लेकिन इसके साथ ही मुख्यमंत्री ठाकरे ने बीच का रास्ता भी निकाला और मंत्रिमंडल की एक उपसमिति बनाकर इसे फिर से लागू करने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया है।
कानून में सुधार पर किसानों से करेंगे चर्चा
राज्य के सहकारिता व पणन (मार्केटिंग) मंत्री बालासाहेब पाटिल ने कहा कि किसानों से चर्चा कर कृषि कानून में सुधार का मसौदा तैयार किया जाएगा। मंत्रिमंडल की उपसमिति राज्य के विभिन्न किसान संगठन के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेगी और उसके बाद सुधार का मसौदा मंत्रिमंडल में पेश किया जाएगा। इसके बाद नए कृषि कानून पर अमल करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पहले ही जारी हो गई थी अधिसूचना
दरअसल, जब नया कृषि कानून अध्यादेश की शक्ल में था, तभी से महाराष्ट्र में इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। बीते सात अगस्त को महाराष्ट्र पणन (मार्केटिंग) विभाग के सचिव की तरफ से अधिसूचना भी जारी कर दी गई। इसके तहत मार्केटिंग निदेशक सतीश सोनी ने 10 अगस्त को राज्य की सभी मंडियों को आदेश जारी किया कि राज्य में प्रस्तावित कानून के तीनों अधिनियमों को सख्ती से लागू किया जाए।