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भारत की ये तोप यूं ही नहीं ले रही है बोफोर्स की जगह, ये है खासियत

Sat, 09 Jun 2018 02:20 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Updated Sat, 09 Jun 2018 02:20 PM IST
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Dhanush artillery gun clears final test, ready for induction

बोफोर्स के स्वदेशी वर्जन धनुष तोप ने पोखरण में अपने अंतिम परीक्षण को पास कर लिया है। इसी के साथ तोप ने भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता भी साफ कर लिया। गन कैरेज फैक्ट्री के सीनियर जनरल मैनेजर एसके सिंह ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, अपने अंतिम परीक्षण में छह धनुष तोपों ने 2 से 6 जून के बीच कुल 300 गोले निशाने पर दागे। हर तोप ने बराबर 50-50 गोले दागे। 

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7 जून को पोखरण में छह तोपों ने लक्ष्य पर दागे 101 गोले

इसी के साथ इसका अंतिम परीक्षण पूरा कर लिया गया। धनुष 155एमएम X 45 एमएम की आर्टिलरी गन यानी तोप है और इसे देसी बोफोर्स कहा जाता है। सिंह ने जानकारी दी कि 7 जून को छह तोपों ने (एक बार और एक लक्ष्य पर) 101 राउंड दागे। उन्होंने आगे बताया कि 2011 से शुरु हुए धनुष के निर्माण का काम 2014 में पूरा हो गया था उसके बाद लगातार 4 सालों से इसका परीक्षण जारी था। 
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हमारी फैक्ट्री द्वारा निर्मित की गई 12 धनुष तोपों में से करीब 4200 राउंड फायर किए गए। परीक्षण में सब कुछ सही पाया गया। इस तोप का ठंडी से ठंडी जगह सिक्किम व लेह और गर्म से गर्म जगह बालासोर, बबीना और पोखरण में परीक्षण किया गया। ठंड, बरसात और गर्मी के अलग-अलग वातावरण मे भी इसकी जांच की गई।
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खासियत

'मेक इन इंडिया’ के तहत बनाई गई धनुष तोप के सभी परिक्षण सफल हुए है। नई तोप का बैरल परीक्षणों में खरा उतरा है। इतना ही नहीं नए बैरल की खासियत यह कि इसे बोफोर्स में भी आसानी से फिट किया जा सकता है। धनुष तोप को तीस साल पुरानी बोफोर्स की जगह तैनात किया जाएगा। 1987 में 414 बोफोर्स तोप स्वीडन से आयात की गईं, जिसमें से अभी 300 तोपें ही तैनात हैं।

वहीं सेना ने आर्डनेंस फैक्ट्री कानपुर को 414 धनुष तोपों का आर्डर दिया गया है। आपको बता दें कि पहले चरण में 114 तोपें तैयार करनी थीं जिसमें से कुछ की आपूर्ति की जा चुकी है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है।

आपको बता दें कि धनुष और एडवांस धनुष देश की पहली ऐसी तोप है, जिसके 90 फीसदी उपकरण भारत में ही निर्मित हैं। खास बात यह कि आर्डनेंस फैक्ट्री कानपुर ने बोफोर्स का बैरल अपग्रेड कर उसे भी आधुनिक बना दिया है। जिसके बाद इस तोप में भी नए बैरल में नए दौर के बारूद का इस्तेमाल हो सकेगा।

आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 2011 में बोफोर्स तोप की टेक्नोलॉजी भारत को देने और भारत में ही बोफोर्स का उत्पादन करने के लिए स्वीडन की कंपनी ने करीब 4 साल का समय मांगा था। लेकिन आर्डनेंस फैक्ट्री कानपुर को जब यह मालूम हुआ तो उसने बोफोर्स से बेहतर नई तोप बनाने का प्रस्ताव सेना को दिया। सेना ने उसे सिर्फ 18 महीने का वक्त दिया।


लेकिन आर्डनेंस फैक्ट्री कानपुर और डीआरडीओ रिकॉर्ड समय में बोफोर्स से बेहतर नई तोप बनाकर सेना को सौंप दी। सेना को देने से पहले इससे 2000 राउंड फायर किए गए। सेना ने भी सियाचिन और राजस्थान में करीब 1500 राउंड टेस्ट फायर करने के बाद इसे बेड़े में शामिल किया।

 

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