{"_id":"63359e58f4fcd10b306b099f","slug":"dgci-allows-serum-institute-to-export-malaria-vaccine-to-uk","type":"story","status":"publish","title_hn":"DGCI: एसआईआई को मिली मलेरिया वैक्सीन यूके को निर्यात करने की मंजूरी, 80 प्रतिशत तक मिलती है सुरक्षा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
DGCI: एसआईआई को मिली मलेरिया वैक्सीन यूके को निर्यात करने की मंजूरी, 80 प्रतिशत तक मिलती है सुरक्षा
Thu, 29 Sep 2022 07:02 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 29 Sep 2022 07:02 PM IST
सार
मलेरिया के टीके को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के जेनर इंस्टीट्यूट में डिजाइन किया गया था, जिसने बड़े पैमाने पर आपूर्ति के लिए वैक्सीन निर्माण और विकास के लिए 2020 में एसआईआई के साथ सहयोग किया था।
विज्ञापन
भारतीय सीरम संस्थान
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
भारत के दवा नियामक ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित मलेरिया के खिलाफ भारत में बने पहले टीकों के ब्रिटेन को निर्यात की अनुमति दे दी है। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को कहा कि भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने वैक्सीन की दो लाख खुराक यूके भेजने की अनुमति दे दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने 27 सितंबर को डीसीजीआई को मलेरिया के खिलाफ टीका निर्यात करने की अनुमति के लिए आवेदन दिया था, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
विज्ञापन
एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि सिंह के हवाले से आवेदन में कहा गया है कि एसआईआई ने हमारे सीईओ डॉ. अदार सी पूनावाला के नेतृत्व में मलेरिया के खिलाफ टीका विकसित किया है। हम अपने देश और दुनिया में मलेरिया के खिलाफ भारत में निर्मित और विश्व स्तरीय टीके उपलब्ध कराने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। अभी विश्व स्तर पर मलेरिया के खिलाफ केवल एक टीका उपलब्ध है और जीएसके इसका निर्माता है। सूत्रों ने कहा कि मलेरिया के टीके को ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के जेनर इंस्टीट्यूट में डिजाइन किया गया था, जिसने बड़े पैमाने पर आपूर्ति के लिए वैक्सीन निर्माण और विकास के लिए 2020 में एसआईआई के साथ सहयोग किया था।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बुर्किना फासो के नैनोरो में 409 बच्चों को शामिल करने वाले टीके के परीक्षण के परिणामों से पता चला है कि एक साल के बाद बूस्टर के बाद तीन प्रारंभिक खुराक बीमारी से 80 प्रतिशत तक सुरक्षा प्रदान करती है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ एसआईआई वर्तमान में अफ्रीकी देशों में उन्नत चरण के परीक्षण कर रहा है।
विज्ञापन