डीजीसीए ने विमानन कर्मियों की भांग, अफीम और अन्य मादक पदार्थों की जांच का रखा प्रस्ताव
नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पहली बार विमानन कर्मियों की भांग, अफीम और अन्य मादक (साइकोएक्टिव) पदार्थ के लिए जांच का प्रस्ताव रखा है। डीजीसीए ने कहा है कि एक बार नियम तय हो जाएं, पहले चरण में देश के छह एयरपोर्ट दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलूरू और हैदराबाद पर फ्लाइट क्रू सदस्यों और एयर ट्रैफिक नियंत्रक (एटीएस) की इसकी जांच की जाएगी।
जांच के तहत कर्मियों की स्क्रीनिंग जांच और पुष्टिकरण जांच कराई जाएगी। स्क्रीनिंग जांच एयरपोर्ट पर या फिर एटीसी कॉम्लेक्स पर होगी और इसे वीडियो में रिकॉर्ड किया जाएगा। यदि कोई कर्मी स्क्रीनिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है तो उसकी पुष्टिकरण जांच कराई जाएगी और यह जांच डीजीसीए से स्वीकृत लैब में होगी।
जांच डीजीसीए अधिकारियों की निगरानी में रैंडम की जाएगी और एक साल की अवधि में प्रत्येक संस्थान के 10 फीसदी कर्मचारियों को इसके लिए चुना जाएगा। जांच के लिए कर्मियों के पेशाब का इस्तेमाल होगा। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) की नीति और प्रक्रियाओं की तर्ज पर किया जा रहा है। इसका प्रस्ताव अमेरिका और यूरोप की एजेंसियां भी रख चुकी हैं।
यदि कोई कर्मी स्क्रीनिंग जांच में पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे पुष्टिकरण जांच का परिणाम आने तक सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्यों से दूर रखा जाएगा। यदि पुष्टिकरण जांच भी पॉजिटिव रहती है तो संबंधित कर्मचारी को पुनर्वास के लिए भेजा जाएगा और लौटने पर उसे सक्रिय कार्य में तभी लगाया जाएगा जब उपचार करने वाले मनोचिकित्सक की मंजूरी और संबंधित संस्थान के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी का प्रमाण पत्र मिल जाएगा।
डीजीसीए ने कहा है कि यदि सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्यों में लौटने के बाद भी कर्मी पुष्टिकरण जांच में पॉजिटिव पाया जाता है तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। यदि को कर्मी जांच कराने से इनकार करता है तो उसे सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्य से बाहर रखा जाएगा और एक हफ्ते के अंदर उसे ‘विस्तृत ड्रग टेस्टिंग प्रोफाइल’ पास करना आवश्यक होगा। इसमें नाकाम रहने पर उसका लाइसेंस तीन साल के लिए रद्द कर दिया जाएगा।
सभी तरह के इंजनों के रखरखाव के लिए एआईईएसएल का साझेदार होगा पीएंडडब्ल्यू
विमान इंजन निर्माता कंपनी प्रैैट एंड व्हिटनी (पीएंडडब्ल्यू) ए320 नियोज समेत सभी तरह के विमानों के इंजनों के रखरखाव के लिए एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) का साझेदार होगी। एक सूत्र के अनुसार, इस साझेदारी के बारे में दोनों कंपनियां जल्द संयुक्त घोषणा करेंगी।
ए320 नियो विमान पीएंडडब्ल्यू इंजनों से संचालित होते हैं लेकिन पिछले करीब चार साल से गड़बड़ी का सामना कर रहे हैं। नियो विमानों का संचालन देश में इंडिगो और गोएयर कर रहे हैं। पीएंडडब्ल्यू का अपने 4056 इंजन मॉडल के रखरखाव का करार एआईईएसएल के साथ पहले से है।
ये इंजन बोइंग 747-सीरीज के विमानों में इस्तेमाल होते हैं। एयर इंडिया और विस्तारा के पास ए320 नियो विमान हैं लेकिन इनमें सीएफएम के लीप-1ए इंजन लगे हुए हैं।