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देशमुख, मुंडे, भुजबल के बाद अब एकनाथ खड़से की कुर्सी खा गया ये 'भूत बंगला'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 06 Jun 2016 02:53 PM IST
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महाराष्ट्र के मालाबार हिल में समुद्र किनारे स्थित सरकारी बंगला, रामटेक
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मुंबई के मालाबार हिल में समुद्र किनारे स्थित सरकारी बंगले- रामटेक को लेकर हमेशा से महाराष्ट्र सरकार के शक्तिशाली मंत्रियों में एक होड़ सी रही है। नवम्बर 2014 में देवेन्द्र फड़नवीस के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद भी इस बंगले को अपने नाम से आवंटित कराने के लिए मंत्रियों में होड़ देखी गई थी। उस समय यह सरकारी बंगला एकनाथ खड़से को आवंटित हुआ था।
8,857 वर्ग फुट में फैला यह सरकारी बंगला एकनाथ खड़से के सरकार से इस्तीफा देने के बाद के बाद एक बार फिर से खाली हो गया है। लेकिन इस बार इस सरकारी बंगले को लेने के लिए कई भी उम्मीदवार सामने नहीं आ रहा है। वजह, इस बंगले को शापित बताया जा रहा है।
एकनाथ खड़से के इस्तीफे से एक बार फिर इस मान्यता को बल मिल रहा है कि यह बंगला शापित है। एकनाथ खड़से से पहले इसमें विलासराव देशमुख, गोपीनाथ मुंडे, छगन भुजबल रह चुके हैं और महाराष्ट्र के इन सभी शक्तिशाली राजनेताओं के साथ इस बंगले में रहने के दौरान दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घट चुकी हैं।
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विलासराव देशमुख इस बंगले में रहने के दौरान 1995 में विधामसभा चुनाव हार गए थे। गोपीनाथ मुंडे को 1996 में इस बंगले में रहने के दौरान उप-मुख्यमंत्री का पद गंवाना पड़ा था, वहीं छगन भुजबल को नाम 2003 में तेलगी घोटाले में सामने आया था। उस वक्त छगन भुजबल भी इसी बंगले में रहते थे।
एकनाथ खड़से ने इस सरकारी बंगले में प्रवेश से पहले वास्तु-पूजा भी कराई थी। महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कहा कि, वो और उनकी पत्नी पहले इस बंगले में रहना चाहते थे, लेकिन अब उन्होंने अपना इरादा बदल लिया है।
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8,857 वर्ग फुट में फैला यह सरकारी बंगला एकनाथ खड़से के सरकार से इस्तीफा देने के बाद के बाद एक बार फिर से खाली हो गया है। लेकिन इस बार इस सरकारी बंगले को लेने के लिए कई भी उम्मीदवार सामने नहीं आ रहा है। वजह, इस बंगले को शापित बताया जा रहा है।
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एकनाथ खड़से के इस्तीफे से एक बार फिर इस मान्यता को बल मिल रहा है कि यह बंगला शापित है। एकनाथ खड़से से पहले इसमें विलासराव देशमुख, गोपीनाथ मुंडे, छगन भुजबल रह चुके हैं और महाराष्ट्र के इन सभी शक्तिशाली राजनेताओं के साथ इस बंगले में रहने के दौरान दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घट चुकी हैं।
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विलासराव देशमुख इस बंगले में रहने के दौरान 1995 में विधामसभा चुनाव हार गए थे। गोपीनाथ मुंडे को 1996 में इस बंगले में रहने के दौरान उप-मुख्यमंत्री का पद गंवाना पड़ा था, वहीं छगन भुजबल को नाम 2003 में तेलगी घोटाले में सामने आया था। उस वक्त छगन भुजबल भी इसी बंगले में रहते थे।
एकनाथ खड़से ने इस सरकारी बंगले में प्रवेश से पहले वास्तु-पूजा भी कराई थी। महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कहा कि, वो और उनकी पत्नी पहले इस बंगले में रहना चाहते थे, लेकिन अब उन्होंने अपना इरादा बदल लिया है।