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ओडिशाः इंसानियत हुई शर्मसार, गांव वालों ने नहीं करने दिया अंतिम संस्कार, मजबूरन दफनाना पड़ा
Thu, 02 Jul 2020 10:16 PM IST
मुकेश कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Thu, 02 Jul 2020 10:16 PM IST
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मृत शरीर को एम्बुलेंस से निकालता भाई-बहन
- फोटो : social media
ओडिशा से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक व्यक्ति की सामान्य बीमारी की वजह से मौत हो गई, लेकिन ग्रामीणों ने कोरोना से हुई मौत समझकर उसके भाई-बहन को शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।
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दरअसल, मामला ओडिशा के गंजाम जिले के कविसूर्यानगर ब्लॉक का है। ट्रैवलिंग सेल्समैन की नौकरी करने वाले सोमनाथ पात्रा पिछले 10 दिनों से बुखार और खांसी से पीड़ित थे। सोमवार को जब उनकी हालत बिगड़ने लगी तो उनके भाई और बहन उन्हें एम्बुलेंस में शीतलापल्ली के कोरोना अस्पताल ले गए।
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अस्पताल पहुंचते-पहुंचते सोमनाथ की मृत्यु हो गई। इसके बाद मृत सोमनाथ के भाई और बहन उसी एम्बुलेंस से सोमनाथ के शव को लेकर गांव लौटे, लेकिन गांव वालों ने उन्हें गांव के अंदर प्रवेश करने से मना कर दिया। गांव वालों को शक था कि सोमनाथ की मौत कोरोना के कारण हुई है, जबकि सोमनाथ की कोरोना जांच तक भी नहीं हुई थी।
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मृत सोमनाथ की बहन संजुक्ता ने कहा, 'हालांकि हमारे कुछ रिश्तेदार थे, लेकिन कोई भी इस डर से नहीं आया कि मेरे भाई की मौत के कारण हुई है। जब हमने मदद मांगी तो हमारे पड़ोसियों ने भी दूसरा रास्ता दिखाया।'
कुछ घंटों के इंतजार के बाद, एम्बुलेंस चालक ने भाई-बहन की जोड़ी को एम्बुलेंस से शव को बाहर निकालने के लिए कहा। उसके बाद भाई-बहन ने शव को प्लास्टिक की चादर में लपेट दिया और सड़क के किनारे दलदली जमीन पर ले गए जहां शव को दफनाना था।
भाई-बहन की दुर्दशा देखकर कुछ लोगों ने स्थानीय प्रशासन को सूचित किया। इसके बाद शव को दफनाने के लिए खुदाई की गई और अंतिम संस्कार की वजाय शव को दफनाया गया।
इस शर्मनाक घटना को लेकर कविसूर्यानगर के तहसीलदार प्रकाश मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से स्थानीय लोगों ने शव के दाह संस्कार में मदद करने से इनकार किया वह शर्मनाक था। एक व्यक्ति को इस संदेह पर कलंकित करना कि उसकी मृत्यु कोरोना के कारण हुई है। बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।'