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Supreme Court: त्रिपुरा में हुई हिंसा की एसआईटी से जांच की मांग, सुप्रीम कोर्ट 31 जनवरी को करेगा सुनवाई
Mon, 24 Jan 2022 09:54 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 24 Jan 2022 09:54 PM IST
सार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एहतेशम हाशमी की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सवाल करने पर त्रिपुरा सरकार का जवाब कि जनहित याचिका दायर करने वाले लोग पश्चिम बंगाल हिंसा पर चुप क्यों हैं? यह पूरी तरह से अनुचित है कि राज्य सरकार तर्क-कुतर्क का रवैया अपना रही है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने त्रिपुरा में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं की विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर 31 जनवरी को सुनवाई करेगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह अगले सोमवार को मामले की सुनवाई करेगी। साथ ही पीठ ने याचिकाकर्ता को त्रिपुरा सरकार द्वारा दायर हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एहतेशम हाशमी की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सवाल करने पर त्रिपुरा सरकार का जवाब कि जनहित याचिका दायर करने वाले लोग पश्चिम बंगाल हिंसा पर चुप क्यों हैं? यह पूरी तरह से अनुचित है कि राज्य सरकार तर्क-कुतर्क का रवैया अपना रही है।
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त्रिपुरा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि त्रिपुरा में कथित तौर पर अक्तूबर में हुए घृणा अपराधों में हस्तक्षेप की मांग करने वाली शीर्ष अदालत के समक्ष याचिका 'चयनात्मक' है क्योंकि याचिकाकर्ता तब चुप था जब पिछले वर्ष मई में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा' हुई थी।
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सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में त्रिपुरा सरकार ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले और बाद में हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला ने पश्चिम बंगाल को हिलाकर रख दिया था, जो त्रिपुरा हिंसा की तुलना में 'परिमाण में बड़ा' था लेकिन याचिकाकर्ता का जन भावना सिर्फ त्रिपुरा में जागी। त्रिपुरा सरकार ने अधिवक्ता एहतेशाम हाशमी की याचिका में हलफनामा दायर किया था। हाशमी ने कथित तौर पर अक्तूबर में त्रिपुरा में हुई हिंसा के मामले में शीर्ष अदालत के तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने डीएमआरसी, डीएएमईपीएल को 31 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में पेश होने का आदेश दिया
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सहायक कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को 31 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट से 4600 करोड़ रुपए से अधिक के मध्यस्थ आदेश को लागू करने से संबंधित विवाद पर जल्द से जल्द सुनवाई का अनुरोध किया।