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देश में पांच लाख डाटा साइंटिस्ट की जरूरत, 2021 में मिलेंगी 7.5 लाख नौकरियां
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 27 Aug 2018 07:15 PM IST
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देश में डाटा साइंटिस्ट (डीएस) की मांग तेजी से बढ़ रही है। आलम यह है कि मांग इतनी है कि इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके कारण मांग-आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तहत डीएस सहित डाटा से जुड़े विशेषज्ञों की मांग 2018 में करीब पांच लाख है, जो 2021 तक बढ़कर साढ़े सात लाख से ज्यादा हो जाएगी।
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आईटी मंत्रालय के मुताबिक, एआई के तहत डाटा साइंटिस्ट के अलावा, डाटा आर्किटेक्ट और सॉफ्टवेयर इंजीनियर आते हैं, जिनकी मांग भी बढ़ रही है। सर्वाधिक मांग डीएस की है, जिन्हें खोए हुए डाटा ढूंढना, गड़बड़ियों को दूर करना और तमाम खामियों से बचाव करना होता है। वर्तमान में सेवा प्रदाताओं के बीच ढाई लाख, स्टार्टअप में 25 हजार, आईटी कंपनियों में 26 हजार, अन्य क्षेत्र की कंपनियों को 1.40 लाख और विदेशी कंपनियों में 92 हजार डीएस की मांग है।
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साइबर सुरक्षा अधिकारियों की मांग बढ़ी
सरकार ने कहा है कि 2021 में देश में 7.50 लाख डीएस की जरूरत होगी। यह मांग पूरी करने के लिए प्रयास शुरू किए जा चुके हैं। अगले तीन साल में करीब पांच लाख से ज्यादा डीएस तैयार होंगे और आपूर्ति की संख्या बढ़कर पांच लाख के करीब होगी। मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया है कि बड़े पैमाने पर जटिल डाटा रोजाना बढ़ रहे हैं। यह कंपनियों, संस्थानों और हेल्थकेयर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों के हैं।
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इसमें सेंध, छेड़खानी तथा एक माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुंचने का जोखिम है। ऐसे में आईटी क्षेत्र में साइबर सुरक्षा अधिकारियों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस पर भी नैस्कॉम काम कर रहा है। आने वाले दिनों में डिजिटल क्षेत्र में भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभाएगा। गौरतलब है कि डाटा साइंटिस्ट गायब हुए डाटा को खोजने में मुख्य भूमिका निभाता है। साथ ही, यह तकनीक का इस्तेमाल करके डाटा का अध्ययन और उस पर निर्णय लेता है।
देश में महज 1.44 लाख कुशल डीएस
कुल 5.11 लाख डीएस की मांग की तुलना में देश में महज 1.44 लाख कुशल डीएस ही मौजूद हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में सरकार ने डीएस की भूमिका को अहम करार देते हुए कहा है कि देश में डाटा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इसकी सुरक्षा के लिए कंपनियों को अहम कदम उठाने होंगे, जिसके लिए देश में डीएस की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। नैस्कॉम इस पर काम कर रहा है। सरकारी और निजी क्षेत्र के संस्थानों में तैयार हो रहे डीएस की संख्या फिलहाल मांग के अनुरूप नहीं है।