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कोरोना वायरस: महामारी से कितने सुरक्षित हैं डॉक्टर और नर्स, अस्पतालों में कब तक पहुंचेगे सेफ्टी किट?
Mon, 30 Mar 2020 10:23 AM IST
श्रीधर मिश्रा
नेश्नल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
नेश्नल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Mon, 30 Mar 2020 10:23 AM IST
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आपस में चर्चा करते डॉक्टर (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
कोरोना वायरस के बढ़ते मामले को देखते हुए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जिसे पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPI) कहते हैं उसकी जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकारी अस्पतालों में PPE की डिलीवरी के लिए कम से कम 25 से 30 वर्किंग दिन लगेंगे। सरकार के लिए बतौर केंद्रीय खरीद एजेंसी काम करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई एचएलएल लाइफकेयर (HLL Lifecare) के Covid-19 आपातकालीन खरीद सेल ने बताया है कि PPE को बनाने के लिए कच्चे माल की जरुरत है, लेकिन कम आपूर्ति और लॉकडाउन के कारण परिवहन की रुकावट यह देरी का कारण बन रही है।
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दरअसल सरकारी अस्पतालों में पीपीई की भारी कमी देखी जा रही है। ऐसे में डिलीवरी में 25 से 30 दिनों की देरी यह एक निराश करने वाली बात है। मुश्किल भरे इस समय में पीपीई की कमी डॉक्टरों से लेकर नर्स और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों को चिंतित कर रही है। कई जगहों पर इसको लेकर विरोध भी हो रहे हैं। हालांकि, संकट की इस घड़ी में सभी स्वास्थ्य कर्मी सेफ्टी गियर के बिना ही काम करने के लिए मजबूर हैं।
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एचएलएल के सूत्रों के मुताबिक, पीपीई किट को अलग-अलग मैन्युफैक्चरर (निर्माताओं) की तरफ से बनाया जाता है और अनिश्चित सप्लाई होती है, क्योंकि अधिकांश निर्माता छोटे और मध्यम क्षेत्र में हैं। सूत्रों ने बताया कि कुछ ही डेजिग्नेडेट कलेक्शन सेंटर्स हैं जिन पर किट को बनाने के लिए सामानों को भेजा जाता है। इसके बाद जिन जगहों पर इनकी जरुरत होती है, वहां इन्हें भेजा जाता है जिससे इस प्रक्रिया में और देरी आती है।
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सूत्रों के मुताबिक कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के बीच अब तक 80,000 पीपीई किट्स को बना कर भेजा गया है जबकि, कपड़ा मंत्रालय का दावा है कि 10 लाख मास्क की आपूर्ति की जा चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कपड़ा मंत्रालय ने 11 भारतीय कंपनियों को पीपीई सूट और दो कंपनियों को मास्क बनाने का काम दिया है।