{"_id":"5b070dca4f1c1bf96e8b47ba","slug":"delhi-university-teachers-write-ugc-against-grant-of-autonomous-status-to-dus-college","type":"story","status":"publish","title_hn":"DU: 'कॉलेजों की स्वायत्ता से विद्यार्थियों को खतरा', मंत्रालय भेजी गई चिट्ठी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
DU: 'कॉलेजों की स्वायत्ता से विद्यार्थियों को खतरा', मंत्रालय भेजी गई चिट्ठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 25 May 2018 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेजों को स्वायत्ता देने की मांग पर अब कई शिक्षक इसके विरोध में उतर आए हैं। जिससे मानव संसाधन विकास मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से जारी प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है। वहीं डीयूटीए ने इस फैसले को गलत बताया है और इसे छात्रों के लिए खतरा बताया है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद् के सदस्य डॉ. एके भागी और राजेश गोगना ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंद्धता प्राप्त कॉलेजों को स्वायत्ता प्रदान करना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। इससे स्वायत कॉलेज स्वपोषित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए स्वतंत्र हो जायेंगे और सीधे तौर पर गरीब व वंचित वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनेंगे।
इतना ही नहीं कॉलेजों को स्वायत्ता मिलने से वह प्रवेश नीति के मोर्चे पर भी दिल्ली विश्वविद्यालय की एकीकृत स्टूडेंट फ्रेंडली दाखिला प्रक्रिया से स्वतंत्र हो जायेंगे जोकि विद्यार्थियों के हित में नहीं है। मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखे इस पत्र में कार्यकारी परिषद् के सदस्यों ने स्वायत्ता दिलाने की दिशा में अग्रसर कॉलेजों के द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। इन सदस्यों ने कहा कि इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णायक संस्थाओं विद्वत परिषद् व कार्यकारी परिषद् की ओर से लिए गए निर्णय को भी नकारा है।
विज्ञापन
डीयू में विद्वत व कार्यकारी परिषद् ने वर्गीकृत स्वायत्ता को नहीं माना है ऐसे में बिना विश्वविद्यालय के अनापत्ति प्रमाण पत्र के कॉलेजों द्वारा स्वायत्ता के लिए आवेदन करना ही अनुचित है। इसी तरह कॉलेजों प्रबंधकों की ओर से इस विषय में अन्य सहभागी फिर वो चाहे शिक्षक हो, कर्मचारी हो या फिर विद्यार्थी से भी चर्चा नहीं की गई। कार्यकारी परिषद के सदस्यों का कहना है कि यदि ट्रस्ट द्वारा संचालित इन कॉलेजों की स्वायत्ता मिल जाती है तो वो दिन दूर नहीं जब स्वायत्त कॉलेजों के नाम पर शिक्षण की दुकानें खुल जाएंगी।
ऐसे में जरूरत है कि ऐसे नियम बनाए जाए जिससे की सुनिश्चित हो सके कि स्वायत्ता के नाम पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के हितों की कोई हानि नहीं होगी। यहां बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखे गए इस पत्र की एक प्रति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व दिल्ली विश्वविद्यालय कुलपति को भी भेजी गई है।
विज्ञापन
दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यकारी परिषद् के सदस्य डॉ. एके भागी और राजेश गोगना ने मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबंद्धता प्राप्त कॉलेजों को स्वायत्ता प्रदान करना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। इससे स्वायत कॉलेज स्वपोषित पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए स्वतंत्र हो जायेंगे और सीधे तौर पर गरीब व वंचित वर्ग से आने वाले विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बनेंगे।
विज्ञापन
इतना ही नहीं कॉलेजों को स्वायत्ता मिलने से वह प्रवेश नीति के मोर्चे पर भी दिल्ली विश्वविद्यालय की एकीकृत स्टूडेंट फ्रेंडली दाखिला प्रक्रिया से स्वतंत्र हो जायेंगे जोकि विद्यार्थियों के हित में नहीं है। मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखे इस पत्र में कार्यकारी परिषद् के सदस्यों ने स्वायत्ता दिलाने की दिशा में अग्रसर कॉलेजों के द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। इन सदस्यों ने कहा कि इस संबंध में दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च निर्णायक संस्थाओं विद्वत परिषद् व कार्यकारी परिषद् की ओर से लिए गए निर्णय को भी नकारा है।
विज्ञापन
डीयू में विद्वत व कार्यकारी परिषद् ने वर्गीकृत स्वायत्ता को नहीं माना है ऐसे में बिना विश्वविद्यालय के अनापत्ति प्रमाण पत्र के कॉलेजों द्वारा स्वायत्ता के लिए आवेदन करना ही अनुचित है। इसी तरह कॉलेजों प्रबंधकों की ओर से इस विषय में अन्य सहभागी फिर वो चाहे शिक्षक हो, कर्मचारी हो या फिर विद्यार्थी से भी चर्चा नहीं की गई। कार्यकारी परिषद के सदस्यों का कहना है कि यदि ट्रस्ट द्वारा संचालित इन कॉलेजों की स्वायत्ता मिल जाती है तो वो दिन दूर नहीं जब स्वायत्त कॉलेजों के नाम पर शिक्षण की दुकानें खुल जाएंगी।
ऐसे में जरूरत है कि ऐसे नियम बनाए जाए जिससे की सुनिश्चित हो सके कि स्वायत्ता के नाम पर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के हितों की कोई हानि नहीं होगी। यहां बता दें कि मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखे गए इस पत्र की एक प्रति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग व दिल्ली विश्वविद्यालय कुलपति को भी भेजी गई है।