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Delhi: दिल्ली की नई वेयरहाउसिंग पॉलिसी में वाहनों से प्रदूषण रोकने पर रहेगा जोर, जनता से राय लेकर बनेगी रणनीति
Sun, 27 Jul 2025 09:06 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Sun, 27 Jul 2025 09:06 PM IST
सार
दिल्ली सरकार नई वेयरहाउसिंग पॉलिसी को बनाने के अंतिम चरण में है लेकिन नीति को अंतिम रूप देने से पहले जनता की राय ली जाएगी। इसके लिए सरकार एक अभियान भी चलाएगी।
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प्रदूषण।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली सरकार राजधानी क्षेत्र के लिए नई वेयरहाउसिंग पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। इसमें सामानों के परिवहन को आसान बनाने के साथ साथ प्रदूषण को कम करने पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार नई वेयरहाउसिंग पॉलिसी को बनाने के अंतिम चरण में है लेकिन नीति को अंतिम रूप देने से पहले जनता की राय ली जाएगी। इसके लिए सरकार एक अभियान भी चलाएगी।
दिल्ली में हर दिन 10 लाख टन माल का लगभग 1.93 लाख वाहनों के जरिए आवागमन होता है, जिनमें से 21% वाहन ट्रैफिक से होकर गुज़रते हैं । सबसे ज्यादा वाहन बिल्डिंग मटेरियल (4,132 वाहन/दिन), टेक्सटाइल (3,995), फल-सब्जियां (2,569) और खाद्य उत्पाद (2,468) लाते हैं, जबकि फार्मास्युटिकल (559) और ऑटोमोबाइल (588) भी ट्रैफिक से गुज़रते हैं। सही वेयरहाउसिंग ज़ोन न होने से ये वाहन शहर के अंदरुनी हिस्सों में आते हैं, जिससे प्रमुख मार्गों पर जाम और प्रदूषण बढ़ता है। सरकार अब इस प्रदूषण को रोकने की योजना पर काम कर रही है।
जानकारी के अनुसार, इस नीति के ड्राफ्ट में पहले ही ऐसे कदम शामिल हैं, जो न केवल दिल्ली का ट्रैफिक जाम कम करेंगे, बल्कि प्रदूषण भी घटाएंगे। साथ साथ दिल्ली में व्यापार को आसान बनाने का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए सरकार डेडिकेटेड लॉजिस्टिक्स हब, ग्रीन फ्रेट कॉरिडोर और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
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दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि ड्राफ्ट पॉलिसी में वेयरहाउस को शहर की सीमा पर शिफ्ट करने का प्रयास किया जाएगा। आज़ादपुर, गाज़ीपुर, नारायणा और करोल बाग जैसे हॉटस्पॉट्स पर जाम और प्रदूषण कम करने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट पॉलिसी में उद्योगों के लिए कई तरह की सब्सिडी का प्रस्ताव है, जिससे स्थायी और सस्टेनेबल उपायों को अपनाने में मदद मिलेगी। इनमें शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से वेयरहाउस शिफ्ट करने पर लीज़ पर जमीन में छूट, नई तकनीक अपनाने के लिए सब्सिडी, और कोल्ड चेन व स्टोरेज सुविधाओं के अपग्रेड के लिए वित्तीय सहायता शामिल है।
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दिल्ली में हर दिन 10 लाख टन माल का लगभग 1.93 लाख वाहनों के जरिए आवागमन होता है, जिनमें से 21% वाहन ट्रैफिक से होकर गुज़रते हैं । सबसे ज्यादा वाहन बिल्डिंग मटेरियल (4,132 वाहन/दिन), टेक्सटाइल (3,995), फल-सब्जियां (2,569) और खाद्य उत्पाद (2,468) लाते हैं, जबकि फार्मास्युटिकल (559) और ऑटोमोबाइल (588) भी ट्रैफिक से गुज़रते हैं। सही वेयरहाउसिंग ज़ोन न होने से ये वाहन शहर के अंदरुनी हिस्सों में आते हैं, जिससे प्रमुख मार्गों पर जाम और प्रदूषण बढ़ता है। सरकार अब इस प्रदूषण को रोकने की योजना पर काम कर रही है।
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जानकारी के अनुसार, इस नीति के ड्राफ्ट में पहले ही ऐसे कदम शामिल हैं, जो न केवल दिल्ली का ट्रैफिक जाम कम करेंगे, बल्कि प्रदूषण भी घटाएंगे। साथ साथ दिल्ली में व्यापार को आसान बनाने का भी ध्यान रखा जा रहा है। इसके लिए सरकार डेडिकेटेड लॉजिस्टिक्स हब, ग्रीन फ्रेट कॉरिडोर और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान लागू करने की दिशा में काम कर रही है।
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दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि ड्राफ्ट पॉलिसी में वेयरहाउस को शहर की सीमा पर शिफ्ट करने का प्रयास किया जाएगा। आज़ादपुर, गाज़ीपुर, नारायणा और करोल बाग जैसे हॉटस्पॉट्स पर जाम और प्रदूषण कम करने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट पॉलिसी में उद्योगों के लिए कई तरह की सब्सिडी का प्रस्ताव है, जिससे स्थायी और सस्टेनेबल उपायों को अपनाने में मदद मिलेगी। इनमें शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से वेयरहाउस शिफ्ट करने पर लीज़ पर जमीन में छूट, नई तकनीक अपनाने के लिए सब्सिडी, और कोल्ड चेन व स्टोरेज सुविधाओं के अपग्रेड के लिए वित्तीय सहायता शामिल है।