{"_id":"5b18eb724f1c1bc96b8b4c10","slug":"delhi-residents-battling-for-water-supply","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली की समस्याओं से विधायक-पार्षद रहे 'अंजान', वाटर सप्लाई से जूझते रहे लोग","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
दिल्ली की समस्याओं से विधायक-पार्षद रहे 'अंजान', वाटर सप्लाई से जूझते रहे लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 07 Jun 2018 01:54 PM IST
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देश की राजधानी दिल्ली में नागरिकों की समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं है। दिल्ली में सबसे ज्यादा शिकायतें पानी की सप्लाई से जुड़ी हैं, लेकिन न तो विधायकों को इसकी फिक्र है और न ही निगम पार्षदों को। अकेले साल 2017 में पानी की सप्लाई की 1,65,735 शिकायतें दर्ज हुईं। यह हालात तब हैं जब दिल्ली जल बोर्ड (डीजीबी) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद हैं।
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प्रजा फांउडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में निगम से संबंधित शिकायतों में 2015 (35,4788) के मुकाबले साल 2017 (38,8484) में 9 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं 2017 में आवारा कुत्तों और बंदरों से परेशानी की 22,574 शिकायतें दर्ज कराई गईं। वहीं पूरी दिल्ली में 73,088 शिकायतें सीवर की समस्या से जुड़ी हुई थीं।
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स्वयंसेवी संस्था प्रजा फाउंडेशन द्वारा जारी श्वेत पत्र में उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सिविल लाइंस इलाके में सबसे नागरिक सबसे ज्यादा परेशान रहे और 51,553 शिकायतें दर्ज कराई गईं। इनमें से सबसे ज्यादा शिकायतें गैर-कानूनी निर्माण से संबंधित थी।
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संस्था द्वारा जारी आंकड़ों में सबसे दिलचस्प पहलू ये रहा कि साल 2017 में विधायकों ने पानी संबंधित समस्याओं को सदन में केवल 59 बार उठाया। वहीं निगम पार्षदों ने अप्रैल से दिसंबर 2017 के बीच वार्ड कमेटी की बैठकों में पानी का मद्दा 29 बार उठाया। प्रजा फाउंडेशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मिलिंद म्हास्के ने बताया कि अप्रैल से दिसंबर तक की अवधि चुनने की वजह एमसीडी चुनाव का अप्रैल 2017 में संपन्न होना रहा। जारी आंकड़ों के मुताबिक नव निर्वाचित प्रत्येक चार पार्षदों ने अप्रैल से दिसंबर 2017 तक किसी भी वार्ड कमेटी की बैठकों में हिस्सा नहीं लिया। फाउंडेशन का दावा है कि उन्हें ये आंकड़े आरटीआई के जरिए हासिल हुए हैं।
टैंकर के जरिए समयबद्ध पानी पहुंचाकर राहत देने का सरकार का दावा भी खोखला साबित हुआ है। टैंकरों का कोई तय समय और जगह न होने की शिकायतों में 548 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2015 में 3,333 शिकायतें थीं, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 47,799 हो गईं।
एनजीओ की एक आरटीआई के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड ने 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2017 के बीच के आंकड़े देने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि तकनीकी समस्या के चलते उनके पास डाटा नहीं था। फाउंडेशन ने अपने श्वेत पत्र में ये सुझाव दिया है कि दिल्ली की रोजमर्रा की समस्याओं को सुलझाने के लिए एक केंद्रीकृत शिकायत निवारण तंत्र बनाए जाने की जरूरत है।
रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि साल 2015 से लेकर दिसंबर 2017 तक बिल्डिंग या घरों में आग लगने की 3.060 शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन केवल 3 बार ही विधायकों ने सदन में इस मुद्दे को उठाया। हैरानी की बात यह है कि पार्षदों ने तीन सालों में केवल एक बार ही आग लगने के समस्या को सदन की बैठक में रखा। वहीं कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में फायर सेफ्टी को तवज्जो दी, तो बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर घोषणापत्र में शामिल ही नहीं किया।