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Pollution: दिवाली में अपने वाहनों के प्रदूषण से घुटा दिल्ली का दम, वाहनों की रफ्तार भी हुई कम

Tue, 01 Nov 2022 08:33 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 01 Nov 2022 08:33 PM IST
सार

पिछले वर्ष दिवाली के सप्ताह में भी लगभग इसी प्रकार के आंकड़े पाए गए थे जो यह साबित करते हैं कि इस दौरान दिल्ली के स्थानीय प्रदूषक तत्वों में वाहनों की भूमिका लगातार गंभीर बनी हुई है। 

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Delhi Pollution reaching high levels as Vehicles emmission out of Control news in hindi
दिल्ली प्रदूषण - फोटो : amar ujala

विस्तार

दिवाली के सप्ताह (21-26 अक्टूबर) में दिल्ली अपने वाहनों से पैदा होने वाले प्रदूषण (Pollution) से जूझती रही। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) के द्वारा दिल्ली-एनसीआर और आसपास के 19 जिलों पर किए गए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि स्थानीय प्रदूषक तत्त्वों के कारण उत्पन्न हुए दिल्ली के कुल प्रदूषण (PM2.5) में वाहनों द्वारा उत्पन्न प्रदूषण की मात्रा लगभग आधी (49.3 से 53 प्रतिशत) रही। यानी दिल्ली के स्थानीय प्रदूषक तत्वों में वाहनों से पैदा होने वाले प्रदूषण की मात्रा सबसे ज्यादा है। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के जिलों में जलाई गई पराली और एनी बायोमास के के कारण पैदा हुआ प्रदूषण कुल का केवल 17 प्रतिशत ही पाया गया है। हालांकि, जब दिल्ली के कुल प्रदूषण के सभी कारकों का समग्र अध्ययन करें तो इसमें बाहरी राज्यों से पैदा होने वाले प्रदूषण की मात्रा काफी अधिक है। 
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त्योहार के कारण ज्यादातर इलाके जाम की गंभीर समस्या से जूझते रहे जिससे पीक टाइम का प्रदूषण और नॉन-पीक टाइम का प्रदूषण स्तर लगभग बराबर रहा। लंबे जाम के कारण इस दौरान ज्यादातर इलाकों में वाहनों की औसत स्पीड भी घटकर 21.3 किमी प्रति घंटा से 31 किमी प्रति घंटा तक रह गई। पिछले वर्ष दिवाली के सप्ताह में भी लगभग इसी प्रकार के आंकड़े पाए गए थे जो यह साबित करते हैं कि इस दौरान दिल्ली के स्थानीय प्रदूषक तत्वों में वाहनों की भूमिका लगातार गंभीर बनी हुई है। 
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इस दौरान घरों से विभिन्न कारणों से पैदा हुए प्रदूषण की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत रही। छुट्टियों के कारन दिवाली सप्ताह में कई जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियों में कमी आ जाती है। यही कारण है कि इस दौरान औद्योगिक कारणों से प्रदूषण की मात्रा केवल 11 प्रतिशत रही। निर्माण इकाईयों का इस दौरान प्रदूषण में हिस्सा सात फीसदी रहा। कूड़े को जलाने से पांच प्रतिशत और अन्य कारणों से चार फीसदी प्रदूषण हुआ। 
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दिल्ली पर वाहनों का भारी बोझ
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) से जुड़ीं प्रदूषण मामलों की विशेषज्ञ शाम्भवी शुक्ला ने अमर उजाला को बताया कि राजधानी दिल्ली की सड़कों पर वाहनों का भारी बोझ है। राजधानी में कुल 1.4 करोड़ वाहन रजिस्टर्ड हैं। इसमें लगभग पांच लाख वाहन प्रति वर्ष नए जुड़ जाते हैं। राजधानी के लिए सबसे बड़ी समस्या इस बात की है कि नए वाहनों में लगभग 97 प्रतिशत निजी वाहन होते हैं। सार्वजनिक वाहनों की कमी, रूट पर वाहन न मिलना, लोगों के आवास से उनके गंतव्य तक सीधे वाहन न मिलने से लोग निजी वाहन को प्राथमिकता देते हैं जो दिल्ली की समस्या को लगातार बढ़ा रहा है।     


प्रदूषण की समस्या को समग्रता से लेने की आवश्यकता है। इसके लिए दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की संख्या में कमी लाने का प्रयास किए जाना चाहिए। पराली प्रबंधन में सभी राज्यों को साथ आकर इसका ठोस उपाय तलाशना चाहिए। नवंबर-दिसंबर महीने में कुल प्रदूषण में पराली की भूमिका बहुत अधिक गंभीर हो जाती है। इसके लिए स्थानीय राज्यों के साथ मिलकर ठोस उपाय किये जाने चाहिए।
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