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बेटी से दुष्कर्म में दिल्ली हाईकोर्ट ने कायम रखी पिता की उम्रकैद
Thu, 26 Mar 2020 04:45 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 26 Mar 2020 04:45 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बेटी से दुष्कर्म को जघन्य और घृणित अपराध करार देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा, संरक्षक और सभी मुश्किलों की ढाल कहे जाने वाले पिता ने ही बच्ची की अस्मिता से खिलवाड़ किया है। ऐसे में सजा को कम नहीं किया जा सकता।
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जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संगिता ढिंगरा सहगल की पीठ ने कहा, जब पिता पुत्री का पवित्र रिश्ता इस तरह नष्ट होता होता है तो यह मानवीय विवेक को बड़ा झटका देता है। पीठ ने कहा, इसमें कोई शक नहीं कि दुष्कर्म एक जघन्य अपराध खुद है लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो यह जघन्य और घृणित अपराध की श्रेणी में आता है।
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यह मानव जाति के लिए खतरा है। इसके साथ ही पीठ ने दोषी पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। इसमें दलील दी थी कि उसकी उम्र 56 वर्ष है और उसके दो अविवाहित बेटे हैं जिनकी जिम्मेदारी उस पर है। इसलिए उसकी सजा को घटाकर 10 वर्ष कर दिया जाए।
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महिलाओं के यौन शोषण के मामले बढ़े
पीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध खासकर यौन शोषण के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि हम अपने विधायी ज्ञान का पालन करें और सम्मान करें, क्योंकि दुष्कर्म या इसका प्रयास किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं है बल्कि यह सामाजिक वातावरण के बुनियादी संतुलन को नष्ट करने का दुस्साहस है। यह सिर्फ एक महिला की गरिमा को कम नहीं करता बल्कि उसे मार भी देता है।