फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Delhi High Court refuses to entertain plea against forceful conversion says it is a personal choice

दिल्ली हाईकोर्ट ने धर्मांतरण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Fri, 13 Mar 2020 01:54 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 13 Mar 2020 01:54 PM IST
विज्ञापन
Delhi High Court refuses to entertain plea against forceful conversion says it is a personal choice
दिल्ली हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को यह कहते हुए धर्मांतरण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि धर्म निजी आस्था का मामला है और किसी दूसरे धर्म को अपनाना या नहीं अपनाना व्यक्तिगत फैसला है।

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने पेशे से वकील याचिकाकर्ता से कहा कि वे याचिका वापस ले लें क्योंकि अदालत इसे खारिज नहीं करना चाहती। अदालत ने कहा, 'आप इसे वापस क्यों नहीं ले लेते? हम इसे खारिज क्यों करें।'
विज्ञापन


इसके बाद याचिकाकर्ता एवं भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी और पीठ ने उन्हें ऐसा करने की इजाजत दे दी। याचिका जब सुनवाई के लिए आई तो अदालत ने कहा कि एक धर्म को मानना निजी आस्था का विषय है और किसी दूसरे धर्म को अपनाना या नहीं अपनाना व्यक्तिगत फैसला है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा, 'हमें बताइए कि हम इसे कैसे रोक सकते हैं? अगर कोई किसी को धमकी दे रहा है या किसी को डरा रहा है, तो यह भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध है।' अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का धमकी या प्रलोभन के चलते धर्मांतरण का शिकार होने का कोई कारण नहीं बनता।

गौरतलब है कि उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि कई व्यक्ति, गैर-सरकारी संगठन और संस्थाएं दबे-कुचले विशेषकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों को 'डराकर, धमकाकर, पैसे का लालच देकर या चमत्कार, काले जादू और अन्य हथकंडे अपनाकर उनका धर्मांतरण करा रहे हैं।'

उन्होंने दावा किया था, 'कई व्यक्ति/संगठन ग्रामीण क्षेत्रों में एससी/एसटी का धर्मांतरण करा रहे हैं और स्थिति बहुत चिंताजनक है। सामाजिक और आर्थिक रूप से दबे-कुचले पुरुषों, महिलाओं और बच्चों विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले पिछले 20 वर्षों में काफी बढ़ गए हैं।'


उन्होंने यह भी दावा किया था कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 79 प्रतिशत हिंदू हैं जबकि 2001 में हिंदुओं की आबादी 86 प्रतिशत थी। अगर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो 'हिंदू भारत में अल्पसंख्यक हो जाएंगे।'

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed