{"_id":"5a0cf2534f1c1b156b8b62df","slug":"delhi-hc-asks-why-sanitary-napkins-not-exempted-from-gst-if-bindi-kajal-is","type":"story","status":"publish","title_hn":"GST पर HC की केंद्र को फटकार- बिंदी-काजल पर छूट, सैनिटरी नैपकिन पर क्यों नहीं","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
GST पर HC की केंद्र को फटकार- बिंदी-काजल पर छूट, सैनिटरी नैपकिन पर क्यों नहीं
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
Updated Thu, 16 Nov 2017 08:11 AM IST
विज्ञापन
दिल्ली उच्च न्यायालय
अदालत ने सैनिटरी नैपकिन को जीएसटी के दायरे से बाहर न रखने पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही कहा कि जब बिंदी, सिंदूर व काजल को जीएसटी से बाहर रखा जा सकता है, तो सैनिटरी नैपकिन को क्यों नहीं। कोर्ट ने कहा कि सरकार आंकड़ों से खेल रही है। जेएनयू में पीएचडी की छात्रा जरमीना इसरार खान ने याचिका दायर कर सैनिटरी नैपकीन पर 12 फीसदी कर लगाने के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में इसे गैर कानूनी बताया गया है।
विज्ञापन
आज से सस्ता हुआ बाहर खाना-पीना, 211 प्रोडक्ट्स पर लगेगा कम GST
विज्ञापन
याचिका की सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सैनिटरी नैपकिन एक बेहद जरूरी उत्पाद है। उस पर कर लगाने का कोई मतलब नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
विज्ञापन
अदालत ने 31 सदस्यीय जीएसटी काउंसिल में एक भी महिला सदस्य न रखे जाने पर नाराजगी जताई। साथ ही पूछा कि नैपकिन पर जीएसटी के मामले में महिला व बाल विकास मंत्रालय से मशविरा किया गया था या केवल आयात-निर्यात के आंकड़ों के आधार पर ही फैसला कर दिया।