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दिल्ली हाईकोर्ट की भी नहीं सुन रहे राजधानी के अस्पताल, नहीं बढ़ाए वेंटिलेटर्स और आईसीयू बेड्स

Tue, 26 Nov 2019 04:18 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 26 Nov 2019 04:18 PM IST
सार

  • इस समय दिल्ली सरकार के अस्पतालों में लगभग 400 बेड उपलब्ध हैं
  • लगभग एक हजार आईसीयू बेड्स होने चाहिए, प्राइवेट अस्पतालों में लगभग 38 फीसदी वेंटिलेटर बेड उपलब्ध

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Delhi govt hospitals not following the delhi high court orders, not increased ICU beds ventilators
अस्पताल में भर्ती बच्चा - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)

विस्तार

दिल्ली सरकार राजधानी में देश के किसी भी अन्य राज्य से बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का दावा करती है। लेकिन उसके अधीन चलने वाले अस्पतालों में आईसीयू बेड्स की संख्या अभी भी बेहद कम बनी हुई है। आईसीयू बेड्स की कमी की खबरें मीडिया में आने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर अस्पतालों को अपने यहां आईसीयू बेड्स की संख्या बढ़ाने को कहा था, लेकिन अदालत में DGHS की तरफ से दाखिल किए गए स्टेटस रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि हाईकोर्ट के आदेश के लगभग दस माह बीत जाने के बाद भी अस्पतालों में आईसीयू बेड्स की संख्या नहीं बढ़ाई गई है।
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केवल 15 अस्पतालों ने दिया जवाब

इस मामले में हाईकोर्ट से कई बार रिमाइंडर भी भेजे गए, लेकिन हैरानी की बात है कि केवल 15 अस्पतालों ने इसका जवाब देने की जरुरत समझी। लगभग बारह अस्पतालों ने हाईकोर्ट के नोटिस के बाद भी इस पर अपना कोई स्पष्टीकरण दाखिल नहीं किया। अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि जिन अस्पतालों ने हाईकोर्ट के नोटिस पर अपना जवाब दाखिल किया है, उनके यहां भी आईसीयू बेड्स की खरीद प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। हालांकि, बताया गया है कि अगले 15-20 दिनों में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। आईसीयू बेड्स की खरीदी प्रक्रिया में लगभग छह माह का समय लगता है।

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33 अस्पतालों में 10 हजार बेड्स

दरअसल, दिल्ली सरकार के अधीन चलने वाले 33 सेंटीनल अस्पतालों में लगभग दस हजार बेड्स हैं। दस फीसदी के मानक के हिसाब से इनमें लगभग एक हजार आईसीयू बेड्स होने चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट में दाखिल जानकारी के आधार पर पता चला है कि इस समय लगभग 400 बेड ही उपलब्ध हैं। इनमें भी लगभग 55 बेड बेहद खराब हालत में हैं, जिन्हें ठीक कराने या बदले जाने की जरुरत है। फिलहाल, आईसीयू बेड्स की खरीद प्रक्रिया अभी भी अधर में है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में इस समय लगभग 38 फीसदी बेड्स आईसीयू कैटेगरी के उपलब्ध हैं।

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दरअसल, दिल्ली में आईसीयू बेड्स की कमी साल की शुरुआत में चर्चा का विषय बन गई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर दिल्ली के अस्पतालों को इस साल फरवरी में अपने यहां कुल बेड के न्यूनतम दस फीसदी आईसीयू बेड रखने का निर्देश दिया था। आदेश में कहा गया था कि अस्पताल अपने यहां नई खरीद के जरिए या पुराने वेंटिलेटर को ठीक करने के बाद वेंटीलेटर्स की उपलब्धि सुनिश्चित कराएं।

वेंटिलेटर्स की जानकारी ऑनलाइन

वहीं, इस बीच यह अच्छी पहल हुई है कि हर अस्पताल को अपने यहां आईसीयू वेंटिलेटर की उपलब्धता ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से तुरंत उपलब्ध करानी होती है। जिससे जिस किसी भी मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता हो, तो उसे खाली वेंटिलेटर वाले अस्पताल में दाखिल कराया जा सके। जानकारी के मुताबिक ज्यादातर अस्पताल अपने यहां खाली आईसीयू बेड्स की जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं।

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