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Delhi Results: भाजपा का वोट शेयर सात फीसदी तो सीटें छह गुना बढ़ीं; केजरीवाल की पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान

Sat, 08 Feb 2025 03:40 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 08 Feb 2025 03:40 PM IST
सार

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने अपने वोट शेयर को काफी मजबूत किया है। उसे चुनाव में 45 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले बार से सात फीसदी ज्यादा है। इसके उलट आप को बड़ा नुकसान हुआ है। उसे अब तक 43.69 फीसदी वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं।

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delhi election result 2025: AAP BJP Congress Vote Share Big loss for arvind Kejriwal
Delhi Result - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। अरविंद केजरीवाल ने अपनी हार स्वीकार ली है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में भाजपा की जीत को सुशासन और विकास की जीत करार दिया है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 15 और ‘आप’ ने 11 सीट पर जीत हासिल कर ली है। भगवा पार्टी 27 साल बाद दिल्ली में सरकार बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है। ताजा रुझानों में भाजपा को दिल्ली की 70 सीटों में से 47 और ‘आप’ को 23 सीटों पर बढ़त दिखाई गई है।

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वोट शेयर के मामले में कैसे हैं आंकड़े?
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने अपने वोट शेयर को काफी मजबूत किया है। उसे चुनाव में 45 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले बार से सात फीसदी ज्यादा है। इसके उलट आप को बड़ा नुकसान हुआ है। उसे अब तक 43.69 फीसदी वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं। पार्टी को पिछले बार के मुकाबले 11 फीसदी का नुकसान होते दिखाई दे रहा है। इन चुनावों में कांग्रेस को भी फायदा हुआ है, लेकिन सीटों के मामले में उसका खाता इस बार भी नहीं खुला। कांग्रेस को अब तक 6.40 फीसदी वोट मिले हैं। यह पिछले बार से करीब दो फीसदी ज्यादा है।
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दिल्ली में बसपा और माकपा को मिले नोटा से भी कम वोट
दिल्ली में विधानसभा चुनाव के शनिवार दोपहर एक बजे तक आए नतीजों और रुझानों से आंकड़ों से पता चलता है कि राष्ट्रीय राजधानी के मतदाताओं ने दो राष्ट्रीय पार्टियों बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की तुलना में ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (नोटा) के विकल्प को प्राथमिकता दी।
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चुनाव आयोग की ओर से दोपहर के समय जारी आंकड़ों से पता चला कि नोटा के विकल्प को 0.57 प्रतिशत मतदाताओं ने वरीयता दी, जबकि बहुजन समाज पार्टी को 0.55 प्रतिशत और माकपा को 0.01 प्रतिशत वोट मिले। बसपा और माकपा दोनों ही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) को 0.01 प्रतिशत और जनता दल (यूनाइटेड) को फीसदी वोट मिले।

पिछले विधानसभा चुनाव का हाल
2020 में दिल्ली की जनता ने विधानसभा चुनाव के लिए 8 फरवरी को वोट डाला था। इस दौरान 64.5 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। परिणामों में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी ने 0.73 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 55 फीसदी वोट हासिल किए। वहीं, भाजपा ने 6.21 फीसदी की उछाल के साथ 38.7% वोट हासिल किए। हालांकि, इसके बावजूद भाजपा को सिर्फ आठ सीटें ही मिलीं। दूसरी तरफ कांग्रेस का वोट प्रतिशत 4.3 फीसदी तक ही रहा। पार्टी ने 2013 और 2015 के बाद एक बार फिर वोट प्रतिशत में गिरावट दर्ज की। 2020 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 5.44 फीसदी और गिर गया। पार्टी को 2015 की तरह ही 2020 के विधानसभा चुनाव में भी कोई सीट नहीं मिली।


पिछले साल लोकसभा चुनाव का हाल
इससे पहले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सभी सात सीटों पर जीत हासिल की थी। उसे कुल 54.7 फीसदी वोट मिले थे। तीन लोकसभा क्षेत्र में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 19 प्रतिशत वोट हासिल हुए, जबकि पांच लोकसभा सीट पर चुनाव लड़कर आप ने 24.3 फीसदी वोट हासिल किए।

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