फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Delhi Doctors gave new life to a nine month old Iraqi child liver transplant done in nine hours

नौ माह के इराकी बच्चे को दिल्ली में मिला नया जीवन, नौ घंटे की जटिल सर्जरी में हुआ लीवर प्रत्यारोपण

Sun, 07 Feb 2021 10:43 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Sun, 07 Feb 2021 10:43 PM IST
विज्ञापन
Delhi Doctors gave new life to a nine month old Iraqi child liver transplant done in nine hours
इराक के नौ माह के बच्चे अली हमाद का दिल्ली में हुआ सफल लीवर प्रत्यारोपण - फोटो : सोशल मीडिया

इराक के एक नौ माह के बच्चे को भारत में नया जीवन मिला है। दरअसल, दिल्ली के एक अस्पताल में इस बच्चे का लीवर प्रत्यारोपण किया गया, जिसके बाद उसे नया जीवन मिल गया। डॉक्टर्स एक साल से कम उम्र के बच्चों में इस तरह के प्रत्यारोपण को जोखिम भरा मानते हैं, लेकिन राजधानी दिल्ली के मणिपाल अस्पताल के डॉक्टरों ने इस चुनौती को स्वीकारा और तीन जनवरी को इस बच्चे की नौ घंटे तक लंबी सफल सर्जरी की।

विज्ञापन

मां ने बताया तीन बच्चों की जा चुकी है जान

जानकारी के अनुसार, नौ महीने के इस मासूम बच्चे का नाम अली हमाद है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि हमाद की मां ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपने लीवर का एक हिस्सा दे दिया। बच्चे की मां ने जानकारी दी कि अली हमाद ने तीन बच्चों के बाद जन्म लिया था। उनका कहना है कि उन तीनों बच्चों की शायद इसी तरह की बीमारी से मौत हो गई थी, जिनका समय पर इलाज नहीं किया जा सका था।

विज्ञापन
विज्ञापन

26 जनवरी अस्पताल से मिली थी छुट्टी

लीवर प्रत्यारोपण और हेपटो-पैनक्रियाटिक-बिलियरी सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. शैलेन्द्र लालवानी ने बताया कि तीन जनवरी को हमाद का प्रत्यारोपण किया गया और 26 जनवरी को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। उनके अनुसार, लीवर में खून की आपूर्ति नहीं होना किसी भी लीवर प्रत्यारोपण करने वाली टीम के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि प्रत्यारोपण वाले बाल रोगियों में नाड़ी संबंधी जटिलताएं अधिक होती हैं।

विज्ञापन

20 दिनों तक अस्पताल में था भर्ती

उन्होंने कहा, "बच्चे की यकृत धमनी में कोई प्रवाह नहीं था। हमने लीवर में रक्त का प्रवाह देने के लिए नस ग्राफ्ट लगाया। सर्जरी के बाद बच्चे को वेंटिलेटर पर आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया।" डॉक्टर ने यह भी कहा, ‘‘हमाद को अगली सुबह वेंटिलेटर से हटा दिया गया और अगले कुछ दिनों में, धीरे-धीरे उसे मुंह के जरिये खाना खिलाना भी शुरू कर दिया गया। सर्जरी के 20 दिनों के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।’’ अस्पताल के कंसल्टेंट पैडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सुफला सक्सेना ने कहा, ‘‘ऐसे मामलों में समय पर उपचार बहुत महत्वपूर्ण है और हमाद सही समय पर अस्पताल आ गया। यह मामला किसी वास्तविक चमत्कार से कम नहीं है।’’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed