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शीला दीक्षित के आते ही कांग्रेस दफ्तर में बढ़ी हलचल, क्या होगा कायाकल्प?

Tue, 22 Jan 2019 09:36 PM IST
अमित मंडल शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Tue, 22 Jan 2019 09:36 PM IST
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Delhi Congress president Sheila dixit will make challenges for opposition
sheila dixit
दिल्ली में कांग्रेस की जड़ों में जान फूंकने के इरादे से राजधानी की राजनीति में लौटी शीला दीक्षित विरोधियों के माथे पर पसीना ला देंगी। 80 साल की शीला ने 16 जनवरी को प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार संभाला है। उनके कार्यभार संभालते ही न केवल पार्टी के भीतर हलचल बढ़ गई है, बल्कि प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में भी रोज बैठकों का सिलसिला चल पड़ा है। शीला दीक्षित दफ्तर में समय देकर पार्टी के कील कांटे दुरुस्त करने में लग गई हैं। 
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सोमवार को शीला दीक्षित ने दिल्ली कांग्रेस महिला मोर्चा की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी के साथ बैठक की। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता हारुन युसुफ भी मौजूद थे। शीला ने बैठक में प्रदेश कांग्रेस महिला मोर्चा के निचले स्तर तक के संगठन के बारे में जानकारी ली। 
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उन्होंने पार्टी के नेताओं से महिलाओं से जुड़े मुद्दे, समस्या और बूथ स्तर तक महिला कांग्रेस को धार देने के उपायों पर चर्चा करके जल्द से जल्द इसे अमल में लाने के लिए कहा है। मंगलवार को शीला दीक्षित ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करके बूथ स्तर तक यूथ, दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग समेत अन्य की तैयारी पर जोर दिया है। 
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सबसे अहम तथ्य यह है कि शीला अध्यक्ष बनने के बाद से कांग्रेस कार्यालय को लगातार समय दे रही हैं। वह छोटे से लेकर बड़े नेता के संपर्क में हैं। 2013 तक कांग्रेस पार्टी के दिल्ली में संगठनात्मक कामकाज देख रहे लोगों में भी ऊर्जा भरने में लगी हैं। 

शीला दीक्षित का मुख्य ध्यान कम से कम समय में संगठन को खड़ा करने, गली मोहल्ला, वार्ड के स्तर पर संपर्क अभियान को तेज करना, हर दरवाजे पर कांग्रेस के नेताओं, युवाओं, महिलाओं द्वारा दस्तक देने पर है। इसके लिए उन्होंने पूरा जोर लगा दिया है। 

कठिन समय में मिली चुनौती

शीला दीक्षित को राजनीति की यह चुनौती बड़े ही कठिन समय में मिली है। इस समय दिल्ली से न तो कांग्रेस का कोई विधायक है और न ही सांसद। पार्टी के नेता भी मानते हैं कि शीला दीक्षित के तीन बार मुख्यमंत्री रहने के बाद 2013 के चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आ गई थी। 


लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के 70 में से 67 विधायक जीते थे। तीन सीट भाजपा को मिली और कांग्रेस का खाता ही नहीं खुला। इसके बाद से कांग्रेस पार्टी का संगठन लगातार कमजोर होता चला गया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी अजय माकन भी कांग्रेस पार्टी को संजीवनी नहीं दे पाए। इसके बाद हारकर राहुल गांधी ने शीला दीक्षित के बूढ़े कंधे पर पार्टी का बोझ डालने का भरोसा किया। 
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