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दिल्ली विधानसभा चुनावों में पाषर्दों को टिकट नहीं देगी भाजपा, 'पंच परमेश्वरों' की लेगी राय!

Wed, 04 Dec 2019 07:33 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 04 Dec 2019 07:33 PM IST
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Delhi BJP will not give ticket to existing Councillors in upcoming delhi assembly election 2020
Delhi BJP - फोटो : Social Media

भाजपा दिल्ली विधानसभा जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। दिल्ली प्रदेश भाजपा अपने स्तर पर हर विधानसभा क्षेत्र के संभावित उम्मीदवारों के लिए एक सर्वे करा रही है। इसके लिए पार्टी हर बूथ पर बनाए गए 'पंच परमेश्वर' अनौपचारिक वार्ता के जरिए जनता की राय ले रही है। जिन उम्मीदवारों की छवि जनता के बीच बेहतर होगी, उनके नामों को ही केंद्रीय इकाई से विचार के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। इस तरह जो उम्मीदवार जनता के बीच लोकप्रिय हैं और जिनके जीतने की संभावना ज्यादा है, उन्हें ही मैदान में उतारा जाएगा।

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पार्टी संगठन से जुड़े एक नेता के मुताबिक प्रदेश स्तर के सर्वे के अलावा पार्टी की केंद्रीय इकाई अपने स्तर पर एक स्वतंत्र सर्वे भी करवा रही है। केंद्रीय इकाई के जरिए हो रहे सर्वे में संभावित उम्मीदवार की जनता के बीच पैठ के साथ-साथ पार्टी के लिए प्रतिबद्धता को भी ध्यान में रखा जाएगा। जो उम्मीदवार इन कसौटी पर खरे उतरेंगे, उन्हें ही विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया जाएगा।

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पार्षदों को टिकट नहीं

विधानसभा चुनाव में नगर निगमों के पार्षद भी जोर आजमाइश करते रहे हैं। पूर्व में उन्हें मैदान में उतारा भी जाता रहा है। लेकिन इस बार संभावना है कि पार्टी पार्षदों को टिकट नहीं देगी। नेता के मुताबिक, पार्षदों के कार्यों को लेकर जनता के बीच एक राय पहले ही बन चुकी होती है। पार्टी उनकी उस छवि से बचना चाहती है। दूसरी बात, दिल्ली के पार्षद भी किसी विधायक से कम नहीं होते। उन्हें भी जनसेवा के लिए पर्याप्त मौका मिलता है। ऐसे में पार्टी विधानसभा स्तर पर नए उम्मीदवारों को उतारने में प्राथमिकता देगी।

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संगठन से भी कुछ को ही मिलेगा मौका

प्रदेश स्तर पर पार्टी संगठन से भी कई नेताओं ने लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी उम्मीदवारी का दावा किया था। लेकिन इस पर विवाद हो गया था। पार्टी के कुछ नेताओं का दावा था कि नामों को अंतिम रुप देने वाली बैठक में शामिल सभी नेताओं ने एक दूसरे के नाम फाइनल कर दिये थे। विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश से उम्मीदवारों की नई लिस्ट मांगी गई थी। इसके बाद ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा हो पाई थी। अब विधानसभा चुनाव के लिए भी केवल उन्हीं नामों को आगे बढ़ाया जाएगा जिनकी जमीनी पकड़ बेहतर होगी। केवल संगठन में उच्च पद पर बैठे होने से किसी नेता की उम्मीदवारी का दावा मजबूत नहीं होगा।

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