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खतरें में 'आप' के ये 20 विधायक, हानि में बदल गए जिनके लाभ के पद

Fri, 19 Jan 2018 05:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Jan 2018 05:48 PM IST
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Delhi Aam Admi Party 20 mla disqualified by ECI

दिल्ली में सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों पर खतरा मंडरा रहा है। आप के इन विधायकों की सदस्यता का जाना लगभग तय माना जा रहा है। चुनाव आयोग ने इस मामले में शुक्रवार को हुई अहम बैठक में फैसला लेते हुए आप के इन लाभार्थियों की सदस्यता रद्द कर दी है। चुनाव आयोग का यह फैसला राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा जाएगा, वहीं से इस फैसले पर आखिरी मुहर लगेगी।

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दिल्ली में पूर्ण बहुमत में आने के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने 67 में से 21 विधायकों को मार्च 2015 में संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त कर दिया। दिल्ली के ही एक वकील प्रशांत पटेल ने सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए इस पद को लाभ का बताते हुए राष्ट्रपति से शिकायत की।
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वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति से इस मामले की शिकायत करते हुए सभी 21 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की। राष्ट्रपति ने इस मामले को चुनाव आयोग के पास भेज दिया।
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हालांकि विधायक जरनैल सिंह के इस्तीफा देने के बाद इस मामले में फंसे विधायकों की संख्या 20 हो गई जिनकी सदस्यता को लेकर चुनाव आयोग में याचिका दायर की गई। शुक्रवार को चुनाव आयोग ने इन 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया।

इस बारे में संविधान के अनुच्छेद 102(1)(A) के अनुसार अगर कोई सांसद या विधायक लाभ के पद का उपयोग करता है तो उसकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। लाभ का यह पद केंद्र या राज्य सरकार किसी के भी अधीन हो सकता है।

AAP के इन 20 विधायकों पर है खतरा

Delhi Aam Admi Party 20 mla disqualified by ECI

1. प्रवीण कुमार- जंगपुरा से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में शिक्षा मंत्री के संसदीय सचिव थे। 

2. शरद कुमार- नरेला से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में राजस्व मंत्री के संसदीय सचिव थे। 

3. आदर्श शास्त्री- द्वारका से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में सूचना मंत्री के संसदीय सचिव थे। 

4. मदन लाल- कस्तूरबा नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में सतर्कता मंत्री के संसदीय सचिव थे। 

5. चरण गोयल- मोती नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में वित्त मंत्री के संसदीय सचिव थे। 

6. सरिता सिंह- रोहतास नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में रोजगार मंत्री के संसदीय सचिव थे।

7. नरेश यादव- महरौली से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में श्रम मंत्री के संसदीय सचिव थे।

8. जरनैल सिंह- तिलक नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में विकास मंत्री के संसदीय सचिव थे।

9. राजेश गुप्ता- वजीरपुर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।

10. अलका लांबा- चांदनी चौक से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में पर्यटन मंत्री के संसदीय सचिव थे।

11. नितिन त्यागी- लक्ष्मी नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में महिलाओं और बच्चे और सामाजिक कल्याण के संसदीय सचिव थे। 

12. संजीव झा- बुराड़ी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री के संसदीय सचिव थे।

13. कैलाश गहलोत- नजफगढ़ से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में कानून मंत्री के संसदीय सचिव थे।

14. विजेंद्र गर्ग- राजेन्द्र नगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में पीडब्ल्यू मंत्री के संसदीय सचिव थे।

15. राजेश ऋषि- जनकपुरी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।

16. अनिल कुमार वाजपेयी- गांधीनगर से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के संसदीय सचिव थे।

17. सोमदत्त- सदर बाजार से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में उद्योग मंत्री के संसदीय सचिव थे।

18. सुखबीर सिंह डाला- मुंडका से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में भाषाएं और अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण के संसदीय सचिव थे।

19. मनोज कुमार- कोंडली से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में भोजन और नागरिक आपूर्ति मंत्री के संसदीय सचिव थे।

20. अवतार सिंह- कालकाजी से विधायक हैं और दिल्ली सरकार में गुरुद्वारा चुनाव मंत्री के संसदीय सचिव थे।

अब क्या होगा ?

Delhi Aam Admi Party 20 mla disqualified by ECI

आयोग अगर विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करता है तो इसे विधायक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। हालांकि जानकारों का एक मत यह भी है कि संसदीय सचिव नियुक्त करने संबंधी केजरीवाल के आदेश की वैधानिकता को हाईकोर्ट में पहले ही चुनौती दी जा चुकी है। 

अदालत इस मामले को उपराज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के अधिकारक्षेत्र से संबंधित याचिका के साथ मिलाकर सुनवाई कर रही है। इसलिए हाईकोर्ट का फैसला आने तक निर्वाचन आयोग कोई सिफारिश नहीं करेगा। 

दिल्ली में 1997 में सिर्फ दो पद (महिला आयोग और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष) ही लाभ के पद से बाहर थे। 2006 में नौ पद इस श्रेणी में रखे गए, पहली बार मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव पद को भी शामिल किया गया था। दिल्ली सरकार मौजूदा कानून में संशोधन कर "मुख्यमंत्री और मंत्रियों के संसदीय सचिव" शब्द को शामिल करना चाहती है।

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