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सुप्रीम कोर्ट: अनुकंपा के आधार पर 23 साल बाद मिली नौकरी, अदालत ने इस आधार पर फैसला किया रद्द
Sat, 20 Nov 2021 04:08 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 20 Nov 2021 04:08 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी प्रदान करने के उड़ीसा उच्च न्यायालय और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के सहमति के फैसले को रद्द कर दिया।
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supreme court
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति में देरी इस तरह के दावे के विपरीत है क्योंकि इससे मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार को तत्काल मदद का उद्देश्य समाप्त हो जाता है। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने दावा करने में देरी का हवाला देते हुए एक सेल के मृतक कर्मचारी के बेटे को अनुकंपा के आधार पर नौकरी प्रदान करने के उड़ीसा उच्च न्यायालय और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के सहमति के फैसले को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला रद्द किया
पीठ ने पीएसयू स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि दावे को आगे बढ़ाने या अदालत जाने में देरी अनुकंपा नियुक्ति के दावे के खिलाफ होगी क्योंकि परिवार को तत्काल सुधार प्रदान करने का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा। सेल ने हाई कोर्ट और कैट के फैसले के खिलाफ अपील की थी।
कैट ने सेल को अपने मृत कर्मचारी के दूसरे बेटे को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने को कहा था। बेटे ने अपनी मां गौरी देवी के जरिए 1996 में नौकरी की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 2019 में कैट के फैसले को उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था।
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दिलचस्प बात यह है कि पिता की मृत्यु के बाद पहले बेटे ने भी 1977 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए सेल अधिकारियों से संपर्क किया था। लेकिन उस समय जारी नीति के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला रद्द किया
पीठ ने पीएसयू स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि दावे को आगे बढ़ाने या अदालत जाने में देरी अनुकंपा नियुक्ति के दावे के खिलाफ होगी क्योंकि परिवार को तत्काल सुधार प्रदान करने का उद्देश्य समाप्त हो जाएगा। सेल ने हाई कोर्ट और कैट के फैसले के खिलाफ अपील की थी।
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कैट ने सेल को अपने मृत कर्मचारी के दूसरे बेटे को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने को कहा था। बेटे ने अपनी मां गौरी देवी के जरिए 1996 में नौकरी की मांग करते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। 2019 में कैट के फैसले को उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था।
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दिलचस्प बात यह है कि पिता की मृत्यु के बाद पहले बेटे ने भी 1977 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए सेल अधिकारियों से संपर्क किया था। लेकिन उस समय जारी नीति के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।