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Defence: टैंक, गोला बारूद व बख्तरबंद गाड़ी तैयार करने वाले हाथ असुरक्षित? '365' दिन के कारण टेंशन में कर्मी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 12 Sep 2024 06:08 PM IST
सार

इस वर्ष 30 सितंबर 2024 को कर्मियों की डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त हो रही है। अब सरकार ने डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि को 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। एआईडीईएफ महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहना चाहते हैं, लेकिन सरकार डीम्ड प्रतिनियुक्ति को टुकड़ों में क्यों बढ़ा रही है, यह समझ से परे है।

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Defence Ministry Ordnance Factory Future Issue Employees facing Insecurity know reason behind Tension
आयुध कारखानों पर सरकार के फैसले से नहीं छंट रहे संशय के बादल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने जून 2021 के दौरान 41 आयुध कारखानों को सात निगमों में परिवर्तित करने का फैसला लिया था। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) ने आयुध कारखानों के निगमीकरण का पुरजोर विरोध किया, मगर सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटी। आयुध कारखानों को 7 निगमों में तबदील कर दिया गया। ऐसे में आयुध कारखानों में काम करने वाले सरकारी कर्मचारी भी निगमों का स्टाफ बन गए। सेवा शर्तें में भी बदलाव हुआ। एआईडीईएफ व दूसरे संगठनों ने सरकार के इस कदम का जमकर विरोध किया। नतीजा, सरकार ने आयुध कारखानों के कर्मियों को डीम्ड प्रतिनियुक्ति पर मान लिया। इस वर्ष 30 सितंबर 2024 को कर्मियों की डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त हो रही है। अब सरकार ने डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि को 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए हैं। एआईडीईएफ महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहना चाहते हैं, लेकिन सरकार डीम्ड प्रतिनियुक्ति को टुकड़ों में क्यों बढ़ा रही है।

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बता दें कि रक्षा क्षेत्र के असैनिक कर्मचारियों के मन में अपने भविष्य को लेकर काफी आशंकाएं थीं। उनकी डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि 30 सितंबर, 2024 को समाप्त हो रही थी। एआईडीईएफ महासचिव सी. श्रीकुमार के मुताबिक, कंपनी में समाहित होने के बाद बीएसएनएल के कर्मचारियों के कड़वे अनुभव के बाद आयुध निर्माणी के कर्मचारियों ने सात आयुध निर्माणी निगमों में शामिल नहीं होने का मन बना लिया है। सरकार ने अब डीम्ड प्रतिनियुक्ति अवधि को 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया है। अब कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा, उनके पास क्या विकल्प है, इस सवाल के जवाब में श्रीकुमार ने बताया, देखिये कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहना चाहते हैं। 
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दूसरी तरफ केंद्र सरकार, डीम्ड प्रतिनियुक्ति को टुकड़ों में आगे बढ़ाए जा रही है। बतौर श्रीकुमार, ये समझ से बाहर है कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है। एआईडीईएफ द्वारा दायर रिट याचिका में मद्रास उच्च न्यायालय में सरकार द्वारा यह वचन देने के बाद कि कर्मचारी जब तक स्वयं कंपनियों में शामिल होने का विकल्प नहीं चुनते हैं, वे केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे। कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए सरकार को तुरंत एक अधिसूचना प्रकाशित करनी चाहिए थी। उसमें यह लिखा होना चाहिए था कि आयुध कारखानों में काम करने वाले कर्मचारी उनकी सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी/रक्षा नागरिक कर्मचारी के रूप में अपनी सेवा देते रहेंगे। मतलब, वे रिटायरमेंट तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे।
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एआईडीईएफ महासचिव ने बताया, कर्मचारियों की लड़ाई यहीं पर खत्म नहीं होती है। सरकार द्वारा आयुध कारखानों के निगमीकरण का फैसला वापस लेने और आयुध निर्माणी बोर्ड का दर्जा बहाल होने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी। निगमीकरण एक असफल प्रयोग है तो सरकार को यह प्रयोग क्यों जारी रखे है। सरकार को सीखने के लिए 3 साल लंबी अवधि मिली है। अब तो सरकार को मालूम हो जाना चाहिए कि आयुध कारखानों के निगमीकरण का फैसला नुकसानदायक है। हमारे देश का एक प्रतिष्ठित रक्षा उद्योग बर्बाद नहीं होना चाहिए। आयुध कारखाने राष्ट्रीय संपत्ति हैं। हमें विश्वास है कि सरकार को एहसास होगा कि यह एक कुछ लोगों की गलत सलाह पर लिया गया एक निर्णय था। इससे न तो देश को फायदा हुआ और न ही कर्मचारियों को। केंद्र सरकार को निगमीकरण का फैसला लेने की सलाह देने वाले लोग आज मलाईदार पदों पर लगे हैं।

एआईडीईएफ के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी. श्रीकुमार ने 21 जून को फेडरेशन के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक संयुक्त  संदेश जारी किया था। फेडरेशन ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से एक अधिसूचना प्रकाशित करने की मांग की थी। इसमें यह घोषणा करने की मांग की गई कि 41 आयुध कारखानों के सभी कर्मचारी और अधिकारी, सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे। उसके बाद सरकार कर्मचारियों की मांग पर चुप्पी साधे रही। रक्षा मंत्रालय ने 21 जून, 2024 को सातों कंपनियों के सीएमडी को अपने निगमों की मानव संसाधन नीतियों को अंतिम रूप देने और आगे बढ़ाने के लिए एक परिपत्र जारी किया। तब कर्मचारी संगठन के द्वारा ऐसी आशंका जाहिर की गई थी कि जुलाई, 2024 के दौरान, कंपनियों में शामिल होने के लिए कर्मचारियों से विकल्प मांगें जाएंगे। एआईडीईएफ अध्यक्ष और महासचिव ने संयुक्त बयान जारी कर कर्मचारियों से अपील की थी कि वे सात निगमों में शामिल होने के विकल्प को स्वीकार न करें। वे आयुध कारखानों के कर्मचारी बने रहें।

श्रीकुमार ने कर्मचारियों से अपील की थी कि वे 7 आयुध निर्माणी निगमों (7 डीपीएसयू) में शामिल होने के विकल्प के जाल में न फंसें। सरकार ने जून 2021 में जब आयुध कारखानों के निगमीकरण की घोषणा की थी, तब कर्मचारी संगठनों ने आयुध कारखानों के निगमीकरण का पुरजोर विरोध किया था। यह निगमीकरण, सरकारों द्वारा अतीत में दिए गए लिखित समझौतों और आश्वासनों का स्पष्ट उल्लंघन है। 16 जुलाई, 2021 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि आयुध निर्माणी का कोई भी कर्मचारी डीपीएसयू कर्मचारी के रूप में निगम में शामिल नहीं होगा। वे आयुध कारखानों में केंद्र सरकार के कर्मचारी/रक्षा नागरिक कर्मचारी के रूप में बने रहेंगे। एआईडीईएफ ने केंद्र सरकार के फैसले को मद्रास उच्च न्यायालय में भी चुनौती दी गई।

कर्मचारी नेता के अनुसार, निगमीकरण के बाद बीएसएनएल का कड़वा अनुभव, जिसमें एक लाख से अधिक कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति 'वीआर' लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। अभी तक कर्मचारियों के टर्मिनल लाभों का निपटान नहीं हुआ है। जो पेंशनभोगी बीएसएनएल से सेवानिवृत्त हुए थे, उनकी पेंशन 7वीं सीपीसी के अनुसार संशोधित नहीं की गई है। आज भी बीएसएनएल कर्मचारियों के वेतन भुगतान की कोई निश्चित तारीख नहीं है। करेंसी नोट छपाई के लिए सरकारी टकसाल (एसपीएमसीआईएल) के निगमीकरण के बाद, रिजर्व बैंक ने संयुक्त उद्यम के नाम पर निजी प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की है। 


एसपीएमसीआईएल बिना कार्यभार के संघर्ष कर रहा है। आयुध कारखानों के एनपीएस कर्मचारी, 7 कंपनियों में शामिल होने के बाद पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का दावा खो देंगे। उनके पास केंद्र सरकार के कर्मचारी/रक्षा नागरिक कर्मचारी का दर्जा भी नहीं रहेगा। इसके चलते उन्हें कई दूसरे आर्थिक और स्वास्थ्य लाभों से हाथ धोना पड़ सकता है। आज यदि कंपनी के पास कार्यभार आदि की कमी के कारण वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं, तो यह सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने कर्मचारियों को वेतन और अन्य लाभ दे। हालांकि, डीपीएसयू कर्मचारियों के मामले में सरकार के लिए ऐसा कोई आदेश नहीं है। कंपनी में शामिल होने के बाद साप्ताहिक कामकाजी घंटे 48 घंटे हो जाएंगे। 

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