{"_id":"5f48bcb88ebc3e4ae00fb826","slug":"defence-minister-reviews-road-map-for-asia-s-biggest-airshow-aero-india-scheduled-for-3-and-7-february-2021","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्षा मंत्रालय बंगलुरू में तीन-पांच फरवरी के बीच करेगा एयरो इंडिया का आयोजन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
रक्षा मंत्रालय बंगलुरू में तीन-पांच फरवरी के बीच करेगा एयरो इंडिया का आयोजन
Fri, 28 Aug 2020 01:43 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 28 Aug 2020 01:43 PM IST
विज्ञापन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : ANI
रक्षा मंत्रालय ने एयरो इंडिया का अगला सत्र कोरोना वायरस महामारी के बावजूद अगले साल बंगलुरू में तीन से पांच फरवरी के बीच आयोजित करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। सूत्रों के मुताबिक पारंपरिक तरीके से इस कार्यक्रम का आयोजन मंत्रालय ने घरेलू रक्षा उद्योग और प्रमुख वैश्विक एयरोस्पेस जगत से चर्चा के बाद किया है।
विज्ञापन
यह आयोजन एशिया की सबसे बड़ी एयरोस्पेस प्रदर्शनी है, सूत्रों का कहना है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस आयोजन के सिलसिले में कई आंतिरक बैठकें भी की हैं। सूत्रों ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी से बचाव के सभी उपायों को ध्यान में रखते हुए और सभी सावधानियों को बरतते हुए इस आयोजन का फैसला हुआ है।
विज्ञापन
एयरो इंडिया प्रदर्शनी की शुरुआत 1996 में हुई थी और तब से ही यह बंगलुरू में आयोजित हो रही है। सूत्रों ने बताया कि एयरोस्पेस उद्योग में विश्व की रक्षा क्षेत्र की बड़ी कंपनियां और प्रमुख निवेशक हिस्सा लेंगे। इनके अलावा कई देशों के आधिकारिक प्रतिनिधियों के भी इसमें शिरकत करने की संभावना है।
विज्ञापन
रक्षा मंत्रालय की योजना इस आयोजन के जरिए भारत के रक्षा उत्पादन की पहल से दुनिया को अवगत कराना है। घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले कुछ महीनों में कई नीतिगत पहल की है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौ अगस्त को घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 101 हथियारों और सैन्य उपकरणों के आयात पर 2024 तक के लिए रोक लगाने की घोषणा की थी। इन उपकरणों में हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मालवाहक विमान, पारंपरिक पनडुब्बियां और क्रूज मिसाइल शामिल हैं। इसके पीछे मकसद घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन देना है।
ऐसे ही एक अन्य घटनाक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सोमवार को घरेलू उद्योग के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए नेविगेशन राडार, टैंक ट्रांसपोर्टर जैसी 108 सैन्य प्रणालियों और उप-प्रणालियों की पहचान की थी।
डीआरडीओ ने कहा कि वह आवश्यकता के आधार पर इन प्रणालियों के डिजाइन, विकास और परीक्षण के लिए उद्योगों को सहायता प्रदान करेगा। भारत शीर्ष वैश्विक रक्षा कंपनियों के लिये सबसे आकर्षक बाजारों में से एक है।
भारत पिछले आठ सालों से सैन्य साजोसामान के शीर्ष तीन आयातकों में शामिल है। अनुमान के मुताबिक भारतीय सशस्त्र बल अगले पांच सालों में 130 अरब डॉलर की खरीद करने वाले हैं। मंत्रालय ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अगले पांच साल में 1.75 लाख करोड़ रुपये (25 अरब डॉलर) के कारोबार का लक्ष्य रखा है। इसमें 35,000 करोड़ रुपये मूल्य के सैन्य साजोसामान का निर्यात शामिल है।