DIAT: राजनाथ सिंह ने 'आत्मनिर्भरता' पर दिया जोर; बोले- 2047 तक विकसित देश होगा भारत
रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समय देश के रक्षा क्षेत्र में निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। 2014 में इस क्षेत्र में निर्यात 900 करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही रक्षा में आत्मनिर्भर भारत के तहत उपकरणों और तकनीक के निर्माण के चलते हमारा आयात भी कम हो गया है। हम स्टार्ट-अप का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आए हैं।
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रक्षा क्षेत्र में साइबर खतरों के बीच राजनाथ सिंह ने दावा किया है कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र होगा। उन्होंने कहा कि देश आत्मनिर्भर बन रहा है और साल 2027 तक विश्व अर्थव्यवस्था में तीसरी रैंक हासिल करेगा। वे महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित उन्नत प्रौद्योगिकी रक्षा संस्थान (DIAT) के दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे।
साइबरस्पेस में बढ़ रहे हैं खतरे
यहां बोलते हुए उन्होंने रक्षा क्षेत्र में बढ़ रहे साइबर खतरों के बारे में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। रक्षा क्षेत्र में भी बदलाव देखा जा रहा है क्योंकि हम इस क्षेत्र में कई तकनीकी बदलाव देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में कई समस्याएं पैदा हुई हैं, खासकर साइबरस्पेस में खतरे बढ़ गए हैं। अपने संबोधन में उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि बदलती स्थिति के साथ हमें प्रौद्योगिकी में उन्नति की ओर बढ़ना होगा। अगर कोई चुनौती सामने आती है तो उसका समाधान भी है।
प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने की होनी चाहिए कोशिश- राजनाथ
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में अब प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए। हमें आत्मनिर्भर बनना होगा, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अन्य देशों से अलग हो जाना है, बल्कि हमारा उद्देश्य यह होना चाहिए कि हमें अन्य देशों की बुनियादी आवश्यकताओं वाली वस्तुओं का निर्माण करने और उन्हें निर्यात करने में सक्षम हों। आगे उन्होंने कहा कि हम अगर देश में वस्तुओं का निर्माण करना शुरू कर देंगे तो इससे हमें रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। आगे उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने सपना देखा है कि 2047 तक भारत दुनिया का विकसित देश बनेगा।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ रहा निर्यात
आगे बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इस समय देश के रक्षा क्षेत्र में निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। 2014 में इस क्षेत्र में निर्यात 900 करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसके साथ ही रक्षा में आत्मनिर्भर भारत के तहत उपकरणों और तकनीक के निर्माण के चलते हमारा आयात भी कम हो गया है। भारत अब सबसे आगे है। हम स्टार्ट-अप का सबसे बड़ा केंद्र बनकर सामने आए हैं। आज भारत राइफल, मिसाइल और विमान बना रहा है। ऐसे में भारत के दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 तक भारत विश्व अर्थव्यवस्था में तीसरा स्थान हासिल कर लेगा। अपने सपने को साकार करने के लिए हमें इस दिशा में काम करना चाहिए।
आईडीईएक्स ने 250वें अनुबंध पर हस्ताक्षर करके हासिल की एक और उपलब्धि हासिल
रक्षा मंत्रालय की प्रमुख पहल इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) सोमवार को अपने 250वें अनुबंध पर हस्ताक्षर किया। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ऐसा करके आईडीईएक्स ने एक और उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्रालय ने इस अनुबंध को लेकर एक बयान भी जारी किया है। इसमें मंत्रालय ने कहा कि यह मिशन डेफस्पेस के तहत पहला अनुबंध भी था।
बयान में बताया गया है कि मिशन डेफस्पेस के पहले आईडीईएक्स अनुबंध अतिरिक्त सचिव (रक्षा उत्पादन) और सीईओ रक्षा नवाचार संगठन (डीआईओ) टी नटराजन और सीईओ, इंस्पेसिटी अरिंद्रजीत चौधरी के बीच किया गया। इंस्पेसिटी 'माइक्रोप्रोपल्शन सिस्टम फॉर क्यूबसैट' चुनौती के विजेताओं में से एक है। इसका नेतृत्व रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा किया जा रहा है। रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने और अन्य वरिष्ठ नागरिक और सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति में अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।