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कर्नाटक: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट सीबर्ड का किया हवाई सर्वेक्षण

Thu, 24 Jun 2021 04:02 PM IST
अजय सिंह एएनआई, कारवार
एएनआई, कारवार Published by: अजय सिंह Updated Thu, 24 Jun 2021 04:02 PM IST
सार

भारतीय नौसेना कारवार में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण नौसैन्य अड्डे का विस्तार कर रही है। एक बार जब यह अड्डा पूरी तरह विकसित हो जाएगा तो यह एशिया में सबसे बड़े नौसैन्य अड्डों में से एक होगा।

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Defence Minister Rajnath Singh conducts an aerial survey of the Indian Navy Project Seabird in Karnataka
राजनाथ ने प्रमुख नौसन्य अड्डों का दौरा किया - फोटो : ani

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्नाटक के कारवार और कोच्चि में भारत के प्रमुख नौसन्य अड्डों का गुरुवार को दो दिवसीय दौरा शुरू किया। कारवार में नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के साथ भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट सीबर्ड का हवाई सर्वेक्षण किया। 
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बता दें कि भारतीय नौसेना कारवार में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण नौसैन्य अड्डे का विस्तार कर रही है। एक बार जब यह अड्डा पूरी तरह विकसित हो जाएगा तो यह एशिया में सबसे बड़े नौसैन्य अड्डों में से एक होगा।
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सूत्रों ने बताया कि कोच्चि में रक्षा मंत्री सिंह भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक जहाज (आईएसी-1) विक्रांत के निर्माण की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। इस जहाज के इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत तक नौसेना में शामिल होने की संभावना है।
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पिछले साल दिसंबर में सीएसएल में विमानवाहक पोत के बेसिन परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुए और इसने महत्वाकांक्षी युद्धपोत निर्माण परियोजना के पहले चरण में प्रवेश किया। बेसिन परीक्षण, समुद्री परीक्षण से पहले पानी में तैरने की स्थिति में जहाज की मशीनरी और उपकरणों का परीक्षण होता है।

एक रक्षा प्रवक्ता ने पहले कहा था कि आईएसी परियोजना आत्मनिर्भर भारत का सही उदाहरण है जिसमें 75 प्रतिशत सामग्री और उपकरण स्वदेशी हैं। इस परियोजना से 50 से अधिक भारतीय विनिर्माता सीधे तौर पर जुड़े हैं और इससे भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं। उन्होंने बताया कि आईएसी पर रोजाना आधार पर करीब 2,000 भारतीयों को सीधा रोजगार मिला, वहीं 40 हजार से अधिक लोगों को परोक्ष रूप से रोजी-रोटी मिली। प्रवक्ता के अनुसार, परियोजना की अनुमानित लागत 20,000 करोड़ रुपये है जिसका 80-85 प्रतिशत धन भारतीय अर्थव्यवस्था में ही लगा है।
 

रक्षा मंत्री ने कहा कि कारवार स्थित नौसेना का अड्डा एशिया का सबसे बड़ा बेस होना चाहिए। इसके लिए मैं बजट बढ़ाने का प्रयास करूंगा। राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना के शिपलिफ्ट कंट्रोल टॉवर और पियर 2 का भी दौरा किया। 

 
विश्व की तीन शीर्ष नौसेना में शुमार हो भारत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत अब विश्व की पांच बड़ी नौसैनिक शक्तियों में शामिल हैं, हमें इसे अगले 10 या 12 वर्षों में शीर्ष तीन में पहुंचाने का लक्ष्य रखना चाहिए। भारत का लक्ष्य अगले 10-12 वर्षों में विश्व की तीन शीर्ष नौसेना में शामिल होने का होना चाहिए। प्रोजेक्ट सीबर्ड का दौरा करने से पहले इसे देखने और समझने की मुझे उत्सुकता थी। मैं कारवार को बहुत करीब से देख कर खुश हूं और कह सकता हूं कि इस नौसेना अड्डे ने मेरे विश्वास को बढ़ा दिया है।

नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के साथ सिंह ने परियोजना क्षेत्र और स्थलों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद वह आईएनएस कदम्ब हेलीपैड पहुंचे। उन्होंने कहा कि मैंने देश की प्रथम सीलिफ्ट सुविधा को भी देखा, जो पूर्व की तुलना में हमारे रखरखाव कार्य को बेहतर करेगा...इसलिए मेरा कहना है कि यह नौसेना अड्डा शेष से अलग है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निर्माण जल्द पूरा होने की उम्मीद है और स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में इसे नौसेना बेड़े में शामिल किए जाने की संभावना है।
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