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Madras High Court: 'केंद्रीय मंत्री के खिलाफ मानहानि मामले को तीन महीने में निपटाएं', हाईकोर्ट का निर्देश
Tue, 05 Sep 2023 06:18 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 05 Sep 2023 06:18 PM IST
सार
जज ने सहायक सत्र न्यायाधीश और अतिरिक्त विशेष अदालत को निर्देश दिया कि मामले के निस्तारण के लिए तमिलनाडु के सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में सुनवाई की जाए।
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डॉ एल मुरुगन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक स्थानीय अदालत को मुरासोली ट्रस्ट के संबंध में केंद्रीय मंत्री और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एल मुरुगन के खिलाफ लंबित मानहानि के एक मामले जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने इसके लिए का तीन महीने की मोहलत दी है। दरअसल, मुरुगन ने सांसदों और विधायकों के मामलों के लिए विशेष अदालत में लंबित मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने का अनुरोध किया था, जिसे जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने खारिज कर दिया।
जज ने सहायक सत्र न्यायाधीश और अतिरिक्त विशेष अदालत को निर्देश दिया कि मामले के निस्तारण के लिए तमिलनाडु के सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में सुनवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मानहानि के अपराध में बयानों का परीक्षण केवल एक सामान्य विवेकशील व्यक्ति के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, जो मानहानिकारक बयान का सामना करता है।
कोर्ट ने कहा कि यहां तक कि अगर याचिकाकर्ता को लगता है कि कोई लांछन नहीं लगाया गया था और उन्होंने केवल एक प्रश्न पूछा था, तो ऐसे बयानों को दूसरे पक्ष द्वारा समझा जाएगा, क्योंकि याचिकाकर्ता बार-बार संपत्ति के अधिकार पर सवाल उठा रहे हैं, जिस पर मुरासोली ट्रस्ट काम कर रहा है। वह यह बात भी उठाना चाहते थे कि ट्रस्ट दलितों को दी गई पंचमी भूमि पर काम कर रहा है।
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जज ने सहायक सत्र न्यायाधीश और अतिरिक्त विशेष अदालत को निर्देश दिया कि मामले के निस्तारण के लिए तमिलनाडु के सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में सुनवाई की जाए। उन्होंने कहा कि मानहानि के अपराध में बयानों का परीक्षण केवल एक सामान्य विवेकशील व्यक्ति के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए, जो मानहानिकारक बयान का सामना करता है।
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कोर्ट ने कहा कि यहां तक कि अगर याचिकाकर्ता को लगता है कि कोई लांछन नहीं लगाया गया था और उन्होंने केवल एक प्रश्न पूछा था, तो ऐसे बयानों को दूसरे पक्ष द्वारा समझा जाएगा, क्योंकि याचिकाकर्ता बार-बार संपत्ति के अधिकार पर सवाल उठा रहे हैं, जिस पर मुरासोली ट्रस्ट काम कर रहा है। वह यह बात भी उठाना चाहते थे कि ट्रस्ट दलितों को दी गई पंचमी भूमि पर काम कर रहा है।
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