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राहत : महंगी नहीं बिकेंगी कैंसर की दवाएं, दुर्लभ बीमारियों पर भी फैसला जल्द

Thu, 28 Feb 2019 06:01 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Thu, 28 Feb 2019 06:01 AM IST
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Decision on cancer patients, rare diseases will not be expensive
breast cancer - फोटो : file photo
महंगी दवाओं के खिलाफ एक बार फिर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण नियामक (एनपीपीए) ने बुधवार को तीन अहम फैसले लिए। इनमें 42 तरह की कैंसर निरोधक दवाइयों को मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल करने का फैसला भी है। अब इन दवाओं पर कंपनियां 8 मार्च के बाद 30 फीसदी से ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पाएंगी। बता दें कि कैंसर की 57 दवाएं पहले से ही सूचीबद्ध फॉर्म्यूलेशन के तहत मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल हैं। साथ ही 38 दुर्लभ बीमारियों की दवाओं को भी जल्द ही नियंत्रण में लाया जाएगा।
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एनपीपीए ने कैंसर, मधुमेह, रक्तचाप, संक्रमण, दर्द, अस्थमा सहित 36 तरह की दवाओं की कीमतों पर भी औषधि कीमत नियंत्रण आदेश 2013 (डीपीसीओ) के तहत नियंत्रण किया है। हालांकि एनपीपीए ने दवा निर्माता कंपनियों को फिलहाल कुछ दिन का वक्त दिया है। नई कीमतें 8 मार्च 2019 से लागू की जाएंगी। सभी औषधि निर्माताओं को सात दिन के अंदर अपने खुदरा मूल्यों में बदलाव कर लेने को कहा गया है। साथ ही इसकी जानकारी एनपीएए के साथ ही राज्य दवा नियंत्रकों, थोक दवा व्यापारियों और खुदरा दवा व्यापारियों को भी देने के लिए कहा गया है। इस बारे में सभी राज्यों के अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को भी लिखित आदेश जारी किए जा रहे हैं। 
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फिलहाल जमकर हो रही दवा मूल्य के नाम पर लूट

देश में लाखों लोग अभी तक दवा मूल्य को लेकर जमकर लूट का शिकार हो रहे हैं। एम्स के जीरिएट्रिक विभाग के डॉ. विजय गुर्जर बताते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों में अक्सर ऑस्टियोपोरिसिस की दिक्कत आती है। ऐसे मरीजों को एक्सोलिक्स 4 एमजी का इंजेक्शन दिया जाता है। एम्स के बाहर मौजूद दवा दुकानों पर इस दवा की कीमत पैकेट पर 2750 रुपये लिखी है, लेकिन दुकानदार महज 500 रुपये में दे रहा है यानी दवा कंपनी ने उस पर 400 फीसदी तक ज्यादा मूल्य प्रिंट किया हुआ है। इसी कारण यदि यही दवा दिल्ली के किसी अन्य बाजार से खरीदी जाए तो वहां मोटा मुनाफा कमाकर 800 से 1200 रुपये तक मरीजों से वसूले जाते हैं।
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105 करोड़ रुपये की होगी बचत

बताया जा रहा है कि कैंसर की 42 तरह की दवाओं को मूल्य नियंत्रण दायरे में लाने से 72 मिश्रण और 355 ब्रांड शामिल होंगे। एनपीपीए के अनुसार, इस फैसले के बाद देश में 105 कैंसर दवा निर्माता कंपनियाें को अपना मुनाफा 85 फीसदी तक घटाना होगा। इससे दवा खरीदने पर कैंसर मरीजों की जेब से करीब 105 करोड़ रुपये कम खर्च होंगे।

यह हुए तीन फैसले

पहला फैसला : विभिन्न बीमारियों की 22 दवाओं की खुदरा और 14 की उच्च कीमतों को संशोधित किया है। इनमें बुडेसोनाइड इनहेलेशन, जेंटामाइसिन और ट्रास्टुजुमाब इंजेक्शन के अलावा मेटफोरमिन के साथ ग्लिकलाजाइड गोली शामिल हैं।

दूसरा फैसला : 42 तरह की कैंसर दवाओं को ट्रेड मार्जिन युक्तिकरण के दायरे में लाया गया। दवा दुकानों के लिए 20 और थोक के लिए 10 फीसदी अधिकतम मुनाफा भी तय किया गया। जिन कैंसर दवाओं की कीमतें तय की हैं, उनमें एजासाइटिडीन, बोर्टेजोमिब, सायटाराबीन, डिसाइटाबीन, लैपेटिनिब, लोमस्टीन, निलोटिनिब, ट्रिप्टोरीलिन, सुनिटिनिब, ओलारट्यूमेब, बेवासिजुमब इत्यादि शामिल हैं।

तीसरा फैसला : सरकार कुछ ही दिन में दुर्लभ बीमारियों की 38 तरह की दवाओं की कीमतें भी तय करेगी। करीब 100 से ज्यादा ब्रांड इसके दायरे में होंगे।
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