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मृत्युदंड पर मंथन : सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेकर दायर किया केस, अटॉर्नी जनरल से मांगी मदद, बचन सिंह केस से उठे सवाल

Wed, 30 Mar 2022 09:35 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 30 Mar 2022 09:35 AM IST
सार

दरअसल, मृत्युदंड की सजा देने की प्रक्रिया पर मंथन का विचार चार दशक पूर्व बचन सिंह मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले पर अमल नहीं होने से जुड़े विभिन्न मुद्दों से पैदा हुआ है। 

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death penalty review : Supreme Court filed the case taking suo motu cognizance, sought help from Attorney General, questions raised from Bachchan Singh case
सुप्रीम कोर्ट में फांसी की सजा प्रक्रिया पर मंथन शुरू - फोटो : amar ujala

विस्तार

दशकों से जेलों में बंद फांसी की सजा पाए कैदियों की सुप्रीम कोर्ट ने सुध ली है। शीर्ष कोर्ट ने मृत्युदंड प्रक्रिया की समीक्षा के लिए मंगलवार को स्वत: संज्ञान लेकर मामला दायर करने के बाद अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की मदद मांगी। 

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दरअसल, मृत्युदंड की सजा देने की प्रक्रिया पर मंथन का विचार चार दशक पूर्व बचन सिंह मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले पर अमल नहीं होने से जुड़े विभिन्न मुद्दों से पैदा हुआ है। इस समीक्षा का मकसद फौजदारी मामलों से जुड़ी न्याय प्रक्रिया में अधिक निष्पक्षता लाना है। जस्टिस उदय यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह मामला दायर किया है। जेलों में 40 सालों से ज्यादा समय से मौत की सजा पाए लोग बंद हैं। इसी तरह बचन सिंह मामले के ऐतिहासिक फैसले पर भी अमल नहीं हुआ है। बचन सिंह के फैसले से ही मृत्युदंड की सजा देने के लिए 'दुर्लभ से दुर्लभतम' अपराध के सिद्धांत को स्थापित किया है। इसके तहत कोर्ट को फांसी की सजा देने का फैसला सुनाने के पहले उत्तेजक परिस्थितियों व अपराध का तुलनात्मक परीक्षण करना अनिवार्य है। इसके आधार पर यह तय किया जाता है कि मृत्युदंड ही दोषी व्यक्ति के लिए एकमात्र सजा है। 

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एक मामले में मंगलवार को सुनवाई फिर से शुरू करते हुए पीठ ने आरोपी के वकील द्वारा जेल में उससे इंटरव्यू करने की इजाजत दे दी। वकील आरोपी से उसके जन्म से लेकर मानसिक स्वास्थ्य व सामाजिक इतिहास पता करेगा, जिसका उस पर असर पड़ा हो। 
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सभी अदालतों के लिए बनेगी गाइडलाइंस
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मृत्युदंड की सजा प्रक्रिया को लेकर विस्तृत गाइडलाइंस बनाएगा। यह फांसी की सजा के मामलों में सभी अदालतों में लागू होगी। कोर्ट ने कहा कि जैसा कि बचन सिंह और उसके बाद के मामलों में तय किया गया था कि दोषी को मौत की सजा दी जाए या नहीं, इस पर निर्णय करते समय हर परिस्थिति पर विचार किया जाना चाहिए।


कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की है। इसके साथ ही न्यायिक समीक्षा में मदद के लिए वरिष्ठ वकील अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और के परमेश्वर को न्याय मित्र नियुक्त किया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को मध्य प्रदेश के मृत्युदंड के एक मामले की अपील पर सुनवाई कर रही थी। 14 फरवरी को इसी मामले में कोर्ट ने बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य (1980) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने का निर्देश दिया। 

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