पुणे के बीपीओ दुष्कर्म-हत्या मामले में उम्रकैद में बदली गई दो दोषियों की मौत की सजा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को साल 2017 के पुणे बीपीओ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोनों दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। अब दोनों दोषियों को 35 साल कारावास में बिताने होंगे। अदालत ने इस फैसले के पीछे दोषियों को फांसी की सजा देने में अनुचित देरी होने का हवाला दिया है।
24 जून को दी जानी थी दोनों दोषियों को फांसी
बता दें कि मामले में दोषी पुरुषोत्तम बोराटे (38) और प्रदीप कोकडे (32) को 24 जून को फांसी दी जानी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने 21 जून को कहा कि जब तक उनका अगला आदेश नहीं आ जाता तब तक सजा पर अमल नहीं किया जाएगा।
दोषियों ने न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें उनकी मौत की सजा पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। सोमवार को न्यायाधीश बीपी धर्माधिकारी और न्यायाधीश स्वप्ना जोशी की पीठ ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया।
सजा देने में देरी होने के कारण लिया फैसला
अदालत ने अपने फैसले में कहा, ‘हमने पाया कि इस मामले में मौत की सजा पर अमल में अनुचित और अतार्किक देरी हुई।’ अदालत ने कहा कि अगर दया याचिकाओं और सजा पर अमल से अति आवश्यक तरीके से निपटा जाता तो देरी टाली जा सकती थी।
पीठ ने कहा, ‘हम पाते हैं कि दया याचिकाओं को निपटाने में राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनुचित और अस्पष्ट देरी हुई है।’ अदालत ने कहा कि सरकार या राज्य के किसी अंग द्वारा देरी दोषियों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ होगा।