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चिंताजनक: छह साल में 5.11 लाख लोगों के खून में जानलेवा बैक्टीरिया, ICMR की रिपोर्ट में खुलासा
Tue, 21 May 2024 12:09 AM IST
निर्मल कांत
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 21 May 2024 12:09 AM IST
सार
Health: आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रोगाणुरोधी प्रतिरोध एएमआर के मामलों की संख्या हर साल बढ़ रही है। 2017 में 7,879, 2018 में 11,379 और 2019 में 13,781 मामले सामने आए। वहीं, साल 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के दौरान क्रमशः 11,097 और 16,037 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए।
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Blood
- फोटो : istock
विस्तार
दवाओं को बेअसर करने वाले सुपरबग और अन्य बैक्टीरिया का प्रसार देश की आबादी में काफी तेजी से बढ़ रहा है। आईसीएमआर-एएमआर निगरानी नेटवर्क की रिपोर्ट में पता चला है कि छह साल में 5.11 लाख लोग इनसे संक्रमित होने के बाद अस्पतालों में भर्ती हुए, जिनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग और ट्रांसजेंडर तक शामिल हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कुछ में सुपरबग तो कुछ में ऐसे रोगजनक पाए गए हैं, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वैश्विक प्राथमिकता वाले रोगजनकों की सूची में शामिल किया गया है। देश में इनका प्रसार एक जैसा नहीं है। दक्षिणी राज्यों में ई. कोली तो उत्तर भारत की आबादी में स्टैफिलोकोकस नामक बैक्टीरिया सबसे ज्यादा सक्रिय है।
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मध्य और पूर्वोत्तर राज्यों में एसिनेटोबेक्टर का प्रसार सबसे ज्यादा है। इनके अलावा क्लेबसिएला, पी. एरुगिनोसा और एंटिरोकोकस बैक्टीरिया का प्रसार सभी क्षेत्रों में लगभग एक जैसा है। हालांकि, जो लोग इनसे संक्रमित हुए उनमें मल्टी ड्रग प्रतिरोध की दर काफी उच्च देखी गई है। ये सभी एंटरोबैक्टीरियासी परिवार के बैक्टीरिया हैं। इनमें कोई रक्त संक्रमण, निमोनिया, पेट का संक्रमण या फिर लिवर को नुकसान पहुंचाता है। कुछ अस्पताल में रहने के दौरान दौरान मरीज को संक्रमित करते हैं। दवा प्रतिरोध की वजह से इनका इलाज काफी मुश्किल होता है और मृत्यु के जोखिम को भी बढ़ाता है। साल 2019 में साइंस जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला कि भारत में रोगाणुरोधी प्रतिरोध की वजह से हर साल करीब 6.8 लाख लोगों की मौत हो रही है।
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हर साल बढ़ रही संख्या...
आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में रोगाणुरोधी प्रतिरोध एएमआर के मामलों की संख्या हर साल बढ़ रही है। 2017 में 7,879, 2018 में 11,379 और 2019 में 13,781 मामले सामने आए। वहीं, साल 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के दौरान क्रमशः 11,097 और 16,037 मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए। 2022 में 21,092 मामलों की पहचान हुई है।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा मरीज
अब तक छह राज्यों की पहचान हुई है, जहां सबसे ज्यादा मामले देखे गए हैं। इनमें सबसे पहले तमिलनाडु है जहां अब तक 15,843 मामले दर्ज हुए। चंडीगढ़ में 10,497, महाराष्ट्र में 10,117, उत्तर प्रदेश में 9,357 और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 5,452 मामले मिले हैं।
महामारी के स्तर तक बढ़ा
दिल्ली के इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान ने जनवरी 2017 से दिसंबर 2022 के बीच कुल 5,11,224 में से 1,00,908 मरीजों पर शोध किया है, जिसे बीते नौ मई को द लांसेट के क्षेत्रीय जर्नल में प्रकाशित किया। यह मरीज देश के 14 राज्यों के 21 अस्पतालों में संक्रमित होने के बाद भर्ती स्तर तक बढ़ा शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) महामारी के स्तर तक बढ़ा है। इस अध्ययन के जरिये पूरे भारत में रक्त प्रवाह संक्रमण में एएमआर के पैटर्न और रुझानों की जांच की। हर माह आबादी में घातक रोगजनकों का प्रसार बढ़ने के सबूत मिले हैं।