दानिश सिद्दीकी: फोटो पत्रकार का पार्थिव शरीर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक, हजारों लोग हुए शामिल
भारतीय फोटो पत्रकार दानिश का शव भारत लाया जा रहा है। वह अफगानिस्तान में तालिबानी हमले में मारे गए हैं।
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अफगानिस्तान में तालिबान की गोलीबारी में मारे गए फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी का पार्थिव शरीर रविवार को जामिया मिलिया इस्लामिया के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले जामिया के गेट नंबर 18 पर नमाज-ए-जनाजा पढ़ा गया। इसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। जामिया नगर के गफ्फार मंजिल में दानिश के घर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
आम लोगों की भारी भीड़ के अलावा कई जानी-मानी हस्तियों ने वहां पहुंचकर दानिश के परिजनों का ढांढस बंधाया और उनकी अंतिम विदाई में हिस्सा लिया। केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष आतिफ रशीद, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने गफ्फार मंजिल पहुंचकर दानिश के परिजनों से मुलाकात की और सांत्वना दी।
रात को करीब साढ़े आठ बजे दानिश का पार्थिव शरीर इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से जामिया नगर के गफ्फार मंजिल लाया गया। यहां उनकी मां के अलावा बाकी परिजनों ने उनके अंतिम दर्शन किए। करीब साढ़े 9 बजे उन्हें दफनाने के लिए जामिया के कब्रिस्तान ले जाया गया। दानिश के जनाजे के साथ जामिया रोड पर चलने वालों की भारी भीड़ थी।
पासपोर्ट हो गया था गुम, तत्काल बनवाया नया
केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष आतिफ रशीद दोपहर से दानिश के घर पर मौजूद थे। वह लगातार अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास के संपर्क में थे, ताकि बिना देरी के पार्थिक शरीर दिल्ली लाया जा सके।
उन्होंने बताया कि दानिश का पासपोर्ट गुम हो गया था। इसलिए शव को भारत भेजने से पहले तत्काल उनका नया पासपोर्ट जारी किया गया। आईजीआई हवाई अड्डे पर दानिश के पिता मोहम्मद अख्तर सिद्दीकी शव लेने के लिए गए थे।
यह कब्रिस्तान विशेष तौर पर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों, उनके जीवनसाथी और नाबालिग बच्चों के लिए बनाया गया है। सिद्दीकी ने इस विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और उनके पिता अख्तर सिद्दीकी विश्वविद्यालय में शिक्षा संकाय के डीन थे। सिद्दीकी ने वर्ष 2005-2007 में एजेके मास कम्युनिकेशन सेंटर (एमसीआरसी) से पढ़ाई की थी। जामिया शिक्षक संघ ने सिद्दीकी के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
2018 में पुलित्जर पुरस्कार मिला था
दानिश सिद्दीकी को वर्ष 2018 में समाचार एजेंसी रॉयटर के लिए काम करने के दौरान पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और गत शुक्रवार को पाकिस्तान की सीमा से लगते अफगानिस्तान के कस्बे स्पिन बोल्दक में उनकी हत्या कर दी गई थी। हत्या के समय वह अफगान विशेष बल के साथ जुड़े थे।
दानिश की मौत पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने जताया शोक
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अफगानिस्तान में पुलित्जर पुरस्कार विजेता फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
दानिश पाकिस्तान से सटी सीमा पर अफगानिस्तान में अफगान सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच संघर्ष की कवरेज कर रहे थे। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा, दानिश का निधन पत्रकारिता के लिए अपूरणीय क्षति है।
दानिश ने पिछले एक दशक के दौरान दक्षिण एशिया व आसपास के कई क्षेत्रों में संघर्ष और मानवीय संकट की कई दिल को दहला देने वाली घटनाओं को कवर किया था।
मसलन रोहिंग्या शरणार्थी संकट, नेपाल भूकंप इराक में युद्ध, श्रीलंका में ईस्टर विस्फोट, 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे और हाल ही में कोरोना महामारी के कारण हुई विनाशकारी मानव त्रासदी की कवरेज प्रमुख हैं। दानिश रोहिंग्या संकट का दस्तावेजीकरण करने के लिए 2018 में पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाली रॉयटर्स टीम का हिस्सा थे।
पिछले कुछ हफ्तों से दानिश को कंधार में अफगान विशेष बलों के साथ एक पत्रकार के रूप में शामिल किया गया था और वह अफगान बलों और तालिबान के बीच चल रहे संघर्ष पर रिपोर्टिंग कर रहे थे।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा व महासचिव संजय कपूर ने कहा, दानिश की मौत उन खतरों की एक याद दिलाती है जो पत्रकार रिपोर्टिंग के दौरान उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि गिल्ड सोशल मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा उनके खिलाफ चलाए जा रहे शातिर और बेहद खेदजनक अभियान से बहुत परेशान है। उनकी मृत्यु उन्हें और उन सभी पत्रकारों को याद करने का अवसर है जो संघर्ष की रिपोर्टिंग में मारे गए हैं।