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India-Denmark: भारतीय नर्सों की शिक्षा की गुणवत्ता सबसे उच्च, भारत दौरे पर आईं डेनमार्क की मंत्री ने की तारीफ
Thu, 07 Mar 2024 05:55 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 07 Mar 2024 05:55 AM IST
सार
भारतीय नर्सों की शिक्षा की गुणवत्ता को बहुत उच्च बताते हुए,मंत्री क्रिस्टीना एगेलुंड ने कहा कि डेनमार्क में भारतीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भर्ती दोनों देशों के बीच संभावित समझौते से काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
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डेनमार्क की मंत्री क्रिस्टीना एगेलुंड
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली चार दिन के दौरे पर आईं डेनमार्क की उच्च शिक्षा और विज्ञान मंत्री क्रिस्टीना एगेलुंड ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा काफी फलदायी रही। इस दौरान उन्होंने कई शोध और शैक्षणिक संस्थानों का दौरा किया।
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मंत्री क्रिस्टीना ने कहा, 'आज मेरी भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री से मुलाकात हुई और हमें इस बारे में विस्तार से चर्चा करने का अवसर मिला।' उन्होंने बताया, 'स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती और शिक्षा पर मेरे देश डेनमार्क और भारत के बीच संभावित साझेदारी कैसी हो सकती है इस पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर मिला।'
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स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भर्ती पर की चर्चा
भारतीय नर्सों की शिक्षा की गुणवत्ता को बहुत उच्च बताते हुए,मंत्री क्रिस्टीना एगेलुंड ने कहा कि डेनमार्क में भारतीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भर्ती दोनों देशों के बीच संभावित समझौते से काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीयों की अंग्रेजी बोलने वाली प्रकृति डेनमार्क में भर्ती के लिए आसान रहेगी।
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डेनमार्क की मंत्री ने आगे बताया, 'वास्तव में, यहां भारत में नर्सों आदि की शिक्षा की गुणवत्ता बहुत, बहुत ऊंची है। इसलिए मुझे लगता है कि जब काम करने के कैरियर के अवसरों की पेशकश की बात आती है तो हमारे दोनों देशों के बीच संभावित समझौते से एक-दूसरे से फायदा हो सकता है।'
मंत्री ने क्रिस्टीने ने कहा, 'भारत पहला देश है जिसके साथ हमने चर्चा की है, जहां हम इस तरह की साझेदारी को पूरा करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसका सबसे पहला कारण है कि भारत में बहुत अच्छा शिक्षित समाज है, खासकर जब स्वास्थ्य देखभाल की बात आती है तब।
अंग्रेजी भाषा ने किया काम आसान
दूसरा कारण यह है कि यह एक अंग्रेजी भाषी देश भी है, जो निश्चित रूप से, दोनों देशों के बीच भाषा की बाधा को दूर करता है, खासकर उस व्यक्ति के लिए जिसे दूसरे देश में जाना पड़ता है और अपने लिए जीवन भी बनाना पड़ता है।