कर्नाटक: दलितों को बाल कटवाने के लिए जाना पड़ता है दूसरे गांव
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कर्नाटक के एक गांव मंछाबले में जातिगत भेदभाव की लड़ाई इतनी गहरी हो गई है कि यहां दलितों को बाल कटवाने के लिए अपने गांव के बजाय दूसरे गांव के सैलून में जाना पड़ता है। यहां दलितों को कथित तौर पर जातिय भेदभाव की वजह सैलून में बाल कटवाने नहीं दिया जाता है।
मीडिया की खबरों के मुताबिक इस गांव में दलितों की संख्या करीब 600 है, जबकि ऊंचे समुदाय के लोगों की संख्या 4,000 है। गांव में साल 2015 से ऊंचे-नीचे समुदायों के बीच लड़ाई चल रही है। आरोप है कि ऊंची जाति के लोगों ने दबाव बनाकर गांव में सैलून बंद करवा दिए जिसका कुछ दलित युवक विरोध कर रहे हैं।
प्रकाश ने बताया कि कई बार मामले को सुलझाने के लिए सभाएं की गई, जिसमें जिला उप आयुक्त भी शामिल हुए, लेकिन हालात अभी भी वैसी ही है। उधर ऊंची जाति के समुदाया वोकालिगा के देवराज का कहना है कि दलितों की ओर से जबरन ये मुद्दा उठाया जा रहा है। उसने बताया कि गांव पंचायत का चेयरमैन भी दलित है फिर भी यहां जाति भेदभाव की राजनीति खेली जाती है।
नाई ने परेशान होकर बंद कर दी दुकान
इस मामले पर गांव के नाई ने बताया कि उसे मजबूरन इसलिए दुकान बंद करनी पड़ी क्योंकि दलित के बाल न काटने के आरोप में उसे जेल में डाल दिया गया। उसने कहा कि हर दिन दबाव में रहने की बजाय दुकान बंद करना ही बेहतर रहा। वहीं उप आयुक्त दिप्ती कनाडे का कहना है कि कुछ लोग यहां सैलून खोलना चाहते हैं और जल्द उन्हें यहां बाल काटने की किट दी जाएंगी।