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BJP President: दलित-महिला या ठाकुर, अध्यक्ष पर कौन दांव खेलेगी भाजपा, खरगे फैक्टर को मात देने की चुनौती

Wed, 12 Jun 2024 09:31 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 12 Jun 2024 09:31 PM IST
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सार
वर्तमान में द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से संबंध रखती हैं और वे देश की राष्ट्रपति हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष के तौर पर इन दोनों समुदायों के नेताओं को आगे बढ़ाने की कोई संभावना नहीं है।
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Dalit-woman or Thakur, which bet will BJP play on the President, challenge to overcome Kharge factor
क्या अध्यक्ष पद के लिए दलित चेहरे पर दांव लगा सकती है भाजपा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जेपी नड्डा के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद इस बात की अटकलबाजी तेज हो गई है कि भाजपा का अगला अध्यक्ष कौन होगा? पार्टी के सभी बड़े नेताओं के मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद यह कयास लगाना मुश्किल हो रहा है कि पार्टी किसे अगला अध्यक्ष बनाएगी। वर्तमान समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी किसी दलित, महिला या ठाकुर समुदाय के नेता को अपना अध्यक्ष बना सकती है। कांग्रेस के दलित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की काट के लिए पार्टी किसी दलित चेहरे पर भी दांव खेल सकती है। 



वर्तमान में द्रौपदी मुर्मू आदिवासी समुदाय से संबंध रखती हैं और वे देश की राष्ट्रपति हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष के तौर पर इन दोनों समुदायों के नेताओं को आगे बढ़ाने की कोई संभावना नहीं है। जेपी नड्डा स्वयं ब्राह्मण समुदाय से आते हैं, इसलिए पार्टी लगातार ब्राह्मण चेहरे को अध्यक्ष बनाने से दूरी बरत सकती है। 


दलित चेहरे के क्या हैं समीकरण
माना जाता है कि दलित नेता मल्लिकार्जुन खरगे को अध्यक्ष बनाने के बाद कांग्रेस को इसका काफी लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाताओं के बहुजन समाज पार्टी से छिटक कर कांग्रेस के खाते में चले जाने को खरगे फैक्टर का असर बताया जा रहा है। भाजपा ने यूपी में दलित मतदाताओं में बड़ी सेंध लगाने में सफलता हासिल की थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे भी दलितों का समर्थन खोना पड़ा है। 2000-2001 में बंगारू लक्ष्मण के बाद पार्टी में कोई दलित अध्यक्ष नहीं बना है। ऐसे में दलित मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी दलित चेहरे पर दांव लगा सकती है। 

राजपूतों को साधने की कोशिश
पिछले चुनाव में राजपूतों के भाजपा से नाराज होने की बात कही जा रही थी। उसे इसका यूपी-राजस्थान सहित कई राज्यों में नुकसान भी हुआ है। ऐसे में किसी राजपूत को पार्टी का अध्यक्ष बनाकर पार्टी इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर सकती है। अनुराग सिंह ठाकुर को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। अनुमान जताया जा रहा है कि अनुराग सिंह ठाकुर को पार्टी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन यह जिम्मेदारी किस रूप में हो सकती है, इस पर कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, वे भाजपा के युवा मोर्चे की जिम्मेदारी निभा चुके हैं और उनका कार्यकाल युवाओं के बीच भाजपा की लोकप्रियता बढ़ाने की दृष्टि से बहुत शानदार रहा था।

क्या कोई महिला बनेगी अध्यक्ष?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने हर काम से एक नया इतिहास रचने के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रधानमंत्री रहने के दौर में ही भाजपा विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी है। पार्टी ने अब तक लगभग हर बड़े समुदाय से पार्टी के अध्यक्ष बनाए हैं, लेकिन अब तक कोई महिला इस पद तक नहीं पहुंच सकी है। नारी शक्ति वंदन कानून लाकर प्रधानमंत्री पहले ही महिलाओं को सशक्त करने के लिए बड़ा कदम उठा चुके हैं, 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को संसद में एक तिहाई आरक्षण दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उसके पहले ही भाजपा किसी महिला को अध्यक्ष बनाकर इस कमी को पूरी कर सकती है। 

इससे पहले यह कवायद
हालांकि, कहा जा रहा है कि जेपी नड्डा को कुछ समय के लिए अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर बरकरार भी रखा जा सकता है। जुलाई से पार्टी सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है। इसके बाद बूथ, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तरीय चुनाव कराने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। अध्यक्ष के चुनाव के बाद कई राज्यों में अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। गुजरात के अध्यक्ष सीआर पाटिल और पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष सुकांता मजूमदार अब केंद्र में मंत्री बन चुके हैं। बिहार भाजपा के अध्यक्ष सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री और हरियाणा के अध्यक्ष नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इन राज्यों में अध्यक्ष बदलना तय है। वहीं, राजस्थान-उत्तर प्रदेश में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन न करने के कारण इनमें भी अध्यक्ष पद पर नए चेहरे लाए जाने की चर्चा है।

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