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Dabholkar Murder: यूएपीए लागू करने में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, बचाव पक्ष के वकील का कोर्ट में दावा
Sun, 03 Mar 2024 01:34 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 03 Mar 2024 01:34 AM IST
सार
वकील इचलकरंजीकर ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने कर्नाटक के संबंधित आईपीएस अधिकारी को नहीं बुलाया, जिन्होंने मामले में गवाह के रूप में उक्त बयान दर्ज किया था। उन्होंने कहा, 'मामले में यूएपीए लागू करने की मंजूरी देते समय किसी उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
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नरेंद्र दाभोलकर
- फोटो : Social media
विस्तार
नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में बहस अभी भी जारी है। इसी कड़ी में शनिवार को बचाव पक्ष ने विशेष अदालत को बताया कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम लागू करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
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2013 की हत्या के मामले में अंतिम बहस के दौरान, बचाव पक्ष के वकील वीरेंद्र इचलकर्णजिकर ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पीपी जाधव के समक्ष अपनी दलील रखी। वकील वीरेंद्र ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने दाभोलकर की गोली मारकर हत्या करने के मामले में कर्नाटक में दर्ज आरोपियों में से एक शूटर के न्यायेतर कबूलनामे पर भरोसा किया।
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वकील ने आगे बताया, 'आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए था, लेकिन पुलिस जानती थी कि अगर उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो वे बेनकाब हो जाएंगे।'
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वकील इचलकरंजीकर ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष ने कर्नाटक के संबंधित आईपीएस अधिकारी को नहीं बुलाया, जिन्होंने मामले में गवाह के रूप में उक्त बयान दर्ज किया था। उन्होंने कहा, 'मामले में यूएपीए लागू करने की मंजूरी देते समय किसी उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कानून कहता है कि मंजूरी एक सचिव द्वारा दी जानी चाहिए लेकिन एक उप सचिव की मंजूरी ली गई।'