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साइबर ठगों ने पहली बार अंबानी, तेंदुलकर का लिया नाम; 70 वर्षीय बुजुर्ग से दो बार ठगी, 2.10 करोड़ रुपये लूटे

Mon, 02 Nov 2026 08:02 PM IST
सुनील मेहरोत्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुनील मेहरोत्रा Updated Mon, 02 Nov 2026 08:02 PM IST
सार

पुणे में 70 वर्षीय बुजुर्ग से साइबर ठगों ने 10 महीने में दो बार कुल 2.10 करोड़ रुपये ठग लिए। पहली बार मुकेश अंबानी, सचिन तेंदुलकर और पी. चिदंबरम के नाम पर निवेश का लालच दिया गया। दूसरी बार ट्राई और मुंबई पुलिस का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया। आखिर ठगों ने कैसे रची दोहरी साजिश और बुजुर्ग को कैसे फंसाया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Cyber Fraudsters Invoke Ambani Tendulkar Names for First Time 70-Year-Old Man Duped Twice Loses Rs 2.10 Crore
साइबर अपराध - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पुणे में अकेले रहने वाले 70 वर्षीय एक बुजुर्ग को साइबर ठगों ने 10 महीने के भीतर दो बार अपना शिकार बनाया। ठगों ने उनसे कुल 2.10 करोड़ रुपये की ठगी की। इस मामले में ठगों ने पहली बार उद्योगपति मुकेश अंबानी, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम जैसी बड़ी हस्तियों के नाम का इस्तेमाल किया। इन हस्तियों के नाम पर निवेश का लालच देकर पहले 1.07 करोड़ रुपये ठगे गए और फिर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 1.02 करोड़ रुपये और ऐंठ लिए गए। इस मामले में 30 अक्टूबर को पुणे साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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पुलिस के अनुसार, ठगी का पहला मामला कुछ महीने पहले का है, जब बुजुर्ग इंटरनेट पर ब्राउजिंग कर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर वेंचर कैपिटल से जुड़े एक विज्ञापन पर पड़ी। विज्ञापन में मुकेश अंबानी, सचिन तेंदुलकर और पी. चिदंबरम के नामों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें इस निवेश योजना का प्रमोटर बताया गया था। विज्ञापन में दावा किया गया था कि 20 हजार रुपये निवेश करने पर एक सप्ताह के भीतर 80 हजार रुपये का रिटर्न मिलेगा। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बाद एक व्यक्ति ने उनसे बात की। उसने खुद को ब्रिटेन की एक कंपनी का मैनेजर बताया। उसके कहने पर बुजुर्ग ने एक ऑनलाइन पेमेंट ऐप के जरिए 20 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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कैसे जीता बुजुर्ग का भरोसा?
एक सप्ताह बाद उस मैनेजर ने उन्हें एक स्टेटमेंट भेजा, जिसमें उनके 20 हजार रुपये का निवेश बढ़कर 80 हजार रुपये दिखाया गया था। इससे बुजुर्ग को भरोसा हो गया कि योजना में अच्छा मुनाफा मिल रहा है। इसके बाद ठगों ने उन्हें पैसे निकालने से रोकते हुए ज्यादा लाभ का लालच दिया। उन्होंने बुजुर्ग को पांच लाख रुपये और निवेश करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। इसके बदले हर महीने 500 डॉलर बोनस देने का वादा भी किया गया। ठगों के झांसे में आकर उन्होंने पांच लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
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ठगों ने जाल में कैसे फंसाया?
इसके बाद ठगों ने उन्हें क्रिप्टोकरेंसी, सोने और ब्रॉन्ज की ट्रेडिंग में निवेश करने के नाम पर लगातार पैसे भेजने के लिए कहा। इस तरह करीब चार महीने में बुजुर्ग ने ठगों के बताए अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में कुल 1.07 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने अपनी रकम वापस निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने इसके लिए 13.5 लाख रुपये और जमा करने की मांग की। इस मांग के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

कुछ महीनों के अंदर दूसरी बार बने शिकार
पहली ठगी के सदमे से बुजुर्ग उबर भी नहीं पाए थे कि जुलाई 2026 में ठगों ने उन्हें दूसरी बार निशाना बना लिया। इस बार उन्हें भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) का अधिकारी बनकर फोन किया गया। कॉल करने वाले ने बताया कि उनके नाम पर रजिस्टर्ड सिम कार्ड का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। इसके कुछ ही समय बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर दूसरे ठग ने उनसे संपर्क किया। उसने दावा किया कि जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान एक एटीएम कार्ड जब्त किया गया है, जो उनके नाम पर जारी हुआ था।

कैसे बुजुर्ग को डराया और धमकाया?
  • इसके बाद ठगों ने बुजुर्ग को गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाना शुरू कर दिया। उन्हें बताया गया कि इस मामले में उनकी भूमिका की जांच हो रही है और पुलिस से क्लियरेंस मिलने तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रहना होगा। ठगों ने उन्हें किसी भी दूसरे व्यक्ति से इस बारे में बात नहीं करने की सख्त हिदायत दी। जांच के नाम पर उनसे उनके सभी बैंक खातों की जानकारी ली गई और जमा रकम ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर करवा ली गई। कुछ ही हफ्तों में बुजुर्ग ने छह अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में कुल 1.02 करोड़ रुपये भेज दिए।
  • ठगों का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने बुजुर्ग पर अपना फ्लैट तक बेचने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी किसी को दी, तो ईडी उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लेगा। आखिरकार जब बुजुर्ग ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो ठगों ने उनसे संपर्क करना बंद कर दिया। उनके सभी फोन नंबर बंद हो गए और ठग गायब हो गए। इस तरह 10 महीने के भीतर एक ही बुजुर्ग से निवेश के लालच और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कुल 2.10 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई।
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