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Cyber Crime: धोखाधड़ी और लोन के नाम पर ठगी सहित 3718 मोबाइल एप ब्लॉक, ठगों से बचाए गए ₹11158 करोड़
Tue, 11 Aug 2026 05:38 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 11 Aug 2026 05:38 PM IST
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Cyber crime
- फोटो : Freepik
केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। देश में सभी तरह के साइबर अपराधों से तालमेल बैठाकर और व्यापक तरीके से निपटने के लिए 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' को एक अटैच्ड ऑफिस के तौर पर स्थापित किया गया है। इसके एक हिस्से के रूप में 'सहयोग' पोर्टल लॉन्च किया गया है, ताकि आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 की उप-धारा (3) के खंड (b) के तहत संबंधित सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।
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इसका मकसद किसी गैर-कानूनी काम के लिए इस्तेमाल की जा रही जानकारी, डेटा या कम्युनिकेशन लिंक को हटाने या उसके एक्सेस को बंद करने में मदद करना है। इस साल 30 जून I4C ने आईटी एक्ट 2000 की धारा 69(A) और धारा 79(3)(b) के तहत धोखाधड़ी वाले लोन एप समेत कुल 3718 मोबाइल ऐप को ब्लॉक किया गया है।
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I4C के हिस्से के तौर पर 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (https://cybercrime.gov.in) लॉन्च किया गया है, ताकि आम लोग सभी तरह के साइबर अपराधों की घटनाओं की रिपोर्ट कर सकें, जिसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर खास ध्यान दिया गया है। इसके तहत 'सिटिज़न फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' को 2021 में लॉन्च किया गया था, ताकि फाइनेंशियल फ्रॉड की तुरंत रिपोर्टिंग की जा सके।
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फ्रॉड करने वालों को पैसे निकालने से रोका जा सके। I4C द्वारा चलाए जा रहे इस मैनेजमेंट सिस्टम के अंतर्गत तीस जून तक 32.80 लाख से ज़्यादा शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम बचाई गई है। I4C ने बैंकों/फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के साथ मिलकर 10.09.2024 को साइबर अपराधियों की पहचान बताने वाली जानकारी की एक ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ लॉन्च की है। जून तक बैंकों से मिले 30.48 लाख से ज़्यादा संदिग्ध पहचान डेटा और 32.08 लाख ‘लेयर 1 म्यूल अकाउंट’ (फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले अकाउंट) की जानकारी सस्पेक्ट रजिस्ट्री में शामिल संस्थाओं के साथ शेयर की गई है। इसकी मदद से 25,698 करोड़ रुपये के ट्रांज़ैक्शन रोके गए हैं। 30.06.2026 तक, पुलिस अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट किए गए 15.75 लाख से ज़्यादा सिम कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबरों को भारत सरकार ने ब्लॉक कर दिया है।
कामकाज को बेहतर बनाने और साइबर क्राइम की शिकायतों को संभालने में एक जैसा तरीका अपनाने के लिए, मंत्रालय ने NCRP-CFCFRMS के लिए एक विस्तृत ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ जारी किया है। यह एसओपी शिकायत प्रोसेस करने, बैंकों के साथ तालमेल बिठाने, शिकायतों का समाधान करने, ‘लीन मार्किंग’ (अकाउंट में रकम को होल्ड करना) हटाने और एनसीआरपी के ज़रिए मिली शिकायतों के आधार पर ठगी गई रकम को सही हकदार को वापस दिलाने के लिए एक स्टैंडर्ड तरीका बताता है। ठगी गई रकम को पीड़ितों को तेज़ी से वापस दिलाने के लिए ‘मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल’ और बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने व रकम पर ‘लीन मार्किंग’ से जुड़ी शिकायतों को समय पर सुलझाने के लिए ‘ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल’ अप्रैल 2026 से चालू कर दिए गए हैं।