CWC Report: भारत के जलाशयों का सुधरा जल स्तर, पर बिहार-ओडिशा और पंजाब-हिमाचल झेल रहे पानी की परेशानी
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 161 प्रमुख जलाशयों में इस समय 57.974 अरब घन मीटर (बीसीएम) जल संग्रहित है। यह इनकी कुल क्षमता का 31.78 फीसदी है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 49.290 बीसीएम और 10 वर्षों के औसत 50.038 बीसीएम से अधिक है।
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भारत के प्रमुख जलाशयों में कुल जल भंडारण में बीते साल के मुकाबले बेहतर सुधार दर्ज किया गया है। बावजूद इसके बिहार, ओडिशा, पंजाब, हिमाचल जैसे कई राज्य गंभीर रूप से कम जल स्तर से जूझ रहे हैं। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के शुक्रवार को जारी साप्ताहिक बुलेटिन में यह जानकारी दी है।
इसके मुताबिक, देश के 161 प्रमुख जलाशयों में इस समय 57.974 अरब घन मीटर (बीसीएम) जल संग्रहित है। यह इनकी कुल क्षमता का 31.78 फीसदी है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 49.290 बीसीएम और 10 वर्षों के औसत 50.038 बीसीएम से अधिक है। यह मौजूदा जल संग्रह राष्ट्रीय स्तर पर बीते साल के स्तर का 117.6 फीसदी और सामान्य औसत का 115.9 फीसदी है। यह जल स्तर में समग्र सुधार का संकेत है। हालांकि, सीडब्ल्यूसी ने चेतावनी दी है कि यह औसत आंकड़ा क्षेत्रीय जल असंतुलन को छुपाता है।
कई प्रमुख जलाशयों में जल संकट
औसत राष्ट्रीय आंकड़े बेहतर हैं, लेकिन देशभर के 41 जलाशयों में सामान्य से 80 फीसदी से भी कम जल संग्रह है और इनमें से 17 में यह 50 फीसदी से भी कम जल है। संकटग्रस्त प्रमुख जलाशयों में पोंग डैम (हिमाचल), मच्छू 2 (गुजरात), भीमा उज्जैनी (महाराष्ट्र) और शोलायार (तमिलनाडु) शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि प्रियदर्शिनी जुराला (तेलंगाना) और रंगावन (उत्तर प्रदेश) सहित पांच जलाशय पूरी तरह सूख चुके हैं।
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पूर्वी क्षेत्र में गहरा जल संकट
बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में जलाशय केवल 27.87 फीसदी क्षमता पर भरे हैं। ये बीते साल के 35.97 फीसदी और सामान्य 34.64 फीसदी से काफी कम है। ओडिशा के रेंगाली और अपर इंद्रावती, बिहार के बदुआ और चंदन, मिजोरम के तुइरियाल जलाशयों में जल स्तर बेहद कम है। तुइरियाल केवल 23.4 फीसदी सामान्य भंडारण पर काम कर रहा है।
सिंधु बेसिन में जल की भारी कमी
हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान समेत उत्तरी राज्यों में जलाशय सिर्फ 24.09% क्षमता पर हैं, जबकि पिछले साल 29.5% था। हिमाचल का पोंग बांध केवल 40.22% और गोबिंद सागर 20.44% क्षमता पर काम कर रहे हैं। पंजाब का थीन डैम भी गंभीर जल की कमी से जूझ रहा है। सिंधु नदी तंत्र इस समय केवल 2.831 बीसीएम जल संग्रह कर पा रहा है। यह इसकी कुल क्षमता 14.819 बीसीएम का मात्र 19.1 फीसदी है।
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पश्चिमी क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन
महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के जलाशय 34.7% क्षमता पर भरे हैं। ये पिछले वर्ष के 28.15% और सामान्य 27% से अधिक है। कई जलाशयों में भंडारण 50% है। मध्य भारत : मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के जलाशय 37.8% क्षमता तक भरे हैं। यह बीते साल के 34.5% और 10 साल के औसत से 30 फीसदी बेहतर है। गांधी सागर, इंदिरा सागर और बाणसागर जैसे बड़े जलाशयों में खासा सुधार देखा गया है।
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