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आलोक वर्मा पर नीरव, माल्या की मदद करने का लगा आरोप, सीवीसी करेगी जांच
Sat, 12 Jan 2019 08:58 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 12 Jan 2019 08:58 AM IST
सार
- केंद्रीय सतर्कता आयोग ने वर्मा के खिलाफ 6 आरोपों को लेकर जांच शुरू की।
- वर्मा ने नीरव मोदी के मामले में सीबीआई के कुछ आंतरिक ईमेलों के लीक होने पर आरोपी को ढूंढने की बजाय मामले को छिपाने की कोशिश की।
- राजीव सिंह के कमरे को लॉक कर करके उनके पास मौजूद नीरव मोदी से संबंधित डाटा को प्राप्त किया गया।
- शिवशंकरन के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को कमजोर किया।
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आलोक वर्मा
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा की परेशानी जल्द खत्म होने का नाम नहीं लेने वाली हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने उनके खिलाफ 6 आरोपों को लेकर जांच शुरू कर दी है। जिसमें बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले आरोपी नीरव मोदी, विजय माल्या और एयरसेल के पूर्व प्रमोटर सी शिवशंकरन के खिलाफ जारी हुए लुक आउट सर्कुलर के आंतरिक ईमेल को लीक करने का आरोप भी शामिल है।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सीवीसी ने सरकार को नए आरोपों को लेकर सूचित किया है। वर्मा के खिलाफ यह शिकायतें भ्रष्टाचार निरोधी इकाई की जांच रिपोर्ट से मिली है। यह शिकायतें पिछले साल 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में जमा कराई गई रिपोर्ट के बाद मिली है। रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि वर्मा पर लगे 10 आरोपों के बाद उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए, जिसे उनके पूर्व नंबर दो रहे विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने लगाया था।
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सीवीसी के एक सूत्र का कहना है कि सीबीआई को 26 दिसंबर को एक पत्र लिखकर कहा गया है कि वह इन मामलों से संबंधित सभी दस्तावेज और फाइलों को मुहैया करवाए ताकि यह जांच किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सके। जांच एजेंसी ने बदले में माल्या से जुड़े सभी दस्तावेज पेश कर दिए जबकि दूसरे अभी रुके हुए हैं। नीरव मोदी और माल्या फिलहाल फरार हैं।
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वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने नीरव मोदी के मामले में सीबीआई के कुछ आंतरिक ईमेलों के लीक होने पर आरोपी को ढूंढने की बजाय मामले को छिपाने की कोशिश की। उन्होंने ऐसा तब किया जब सबसे बड़े बैंक घोटाले की जांच चरम पर थी। एजेंसी ने जून 2018 में संयुक्त निदेशक राजीव सिंह (नीरव मोदी के मामले की जांच करने वाले अधिकारी) के कमरे को लॉक कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) को बुलाया था ताकि उनके पास मौजूद डाटा को प्राप्त किया जा सके। हालांकि इस कार्य के पीछे की वजह कभी नहीं बताई गई।
दूसरा बड़ा आरोप वर्मा पर शिवशंकरन के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को कमजोर करने का है। आईडीबीआई बैंक में 600 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले शिवशंकरन ने को भारत से जाने की इजाजत दी गई। यह जानकारी मिली है कि संयुक्त निदेशक रैंक के अधिकारी ने शिवशंकरन से अपने दफ्तर और पांच सितारा होटल में मुलाकात की थी। यह मुलाकात सेवा नियमों और सीबीआई की आंतरिक प्रक्रियाओं के विपरीत थी। इस मुलाकात के बाद उसके खिलाफ जारी सर्कुलर को कमजोर कर दिया गया था।
तीसरा गंभीर आरोप माल्या के लुकआउट सर्कुलर को अक्तबूर 2015 में कमजोर करने का है। माल्या पर आईडीबीआई बैंक के साथ 900 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के खिलाफ मामला दर्ज है। जिसमें यूके की अदालत ने कुछ दिनों पहले ही उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिया है। सर्कुलर जारी होने के एक महीने के अंदर ही सीबीआई के संयुक्त निदेशक एके शर्मा, वर्मा के करीबी ने आव्रजन अधिकारियों से इसे कमजोर करके 'हिरासत' में लेने की बजाए 'सूचित करने' को कर दिया। इससे विजय माल्या को देश छोड़कर भागने में मदद मिली।