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चिंताजनक: पांच करोड़ लोग मिर्गी से ग्रस्त, तीन दशक में 11 फीसदी बढ़े मरीज; हर साल जाती है 90 लाख लोगों की जान

Sat, 01 Mar 2025 04:39 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 01 Mar 2025 04:39 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, मिर्गी, जिसे एपिलेप्सी भी कहा जाता है, एक आम लेकिन गंभीर मस्तिष्क संबंधी विकार है। यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर दुनिया का चौथा सबसे आम तंत्रिका संबंधी विकार है जो मुख्य रूप से नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है।

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Currently 5 crore people worldwide suffer from epilepsy
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Freepik.com

विस्तार

वर्तमान में दुनियाभर में 5.2 करोड़ लोग मिर्गी की बीमारी से ग्रस्त हैं। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी 2021 (जीबीडी) के अनुसार, 1990 से 2021 के बीच मिर्गी के मामलों में 10.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। जलवायु परिवर्तन का असर भी मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर देखा जा रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, मिर्गी, जिसे एपिलेप्सी भी कहा जाता है, एक आम लेकिन गंभीर मस्तिष्क संबंधी विकार है। यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर दुनिया का चौथा सबसे आम तंत्रिका संबंधी विकार है जो मुख्य रूप से नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। इस बीमारी के कारण मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि असामान्य हो जाती है, जिससे मरीज को बार-बार दौरे पड़ सकते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति अपने शरीर पर नियंत्रण खो सकता है। बीमारी की बेहतर पहचान भी हो सकती है। मिर्गी के दौरे हल्के भी हो सकते हैं और गंभीर भी, लेकिन उचित दवाइयों से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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अमीर और गरीब देशों में बड़ा अंतर
दुनियाभर में मिर्गी के मामलों का वितरण असमान है। 2021 में कम और मध्यम आय वाले देशों में मिर्गी के तीन से चार गुना अधिक मामले और मौतें दर्ज की गईं, जबकि कम आय वाले देशों में नए मामलों की संख्या 82.1 फीसदी तक बढ़ गई और इनकी तुलना में मौतें 84.7 फीसदी अधिक थीं।  शोध के दौरान उन क्षेत्रों की पहचान की गई है, जहां मिर्गी के मामले सबसे अधिक हैं। इससे वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को बेहतर इलाज और रोकथाम के उपाय विकसित करने में मदद मिलेगी।
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मौतों में 14.5 फीसदी की गिरावट
अध्ययन में यह भी पाया गया कि 1990 से 2021 के बीच मिर्गी से होने वाली मौतों में 14.5 फीसदी की गिरावट आई है। इसका श्रेय बेहतर इलाज और समय पर सही पहचान को दिया जा सकता है। हालांकि, शोध से यह भी सामने आया है कि मिर्गी समय से पहले मृत्यु के जोखिम को तीन गुना तक बढ़ा सकती है।


हर साल जाती है 90 लाख लोगों की जान
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के बदलते पैटर्न और चरम मौसमी घटनाओं का मिर्गी और अन्य मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर दुनियाभर में मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है, जिससे हर साल करीब 90 लाख लोगों की जान जाती है।

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